‘सशक्त एप’ बना पुलिस का डिजिटल हथियार: 10 दिनों में 49 चोरी की बाइक बरामद, SIMS कैंपस गैंग का खुलासा

‘सशक्त एप’ बना पुलिस का डिजिटल हथियार: 10 दिनों में 49 चोरी की बाइक बरामद, SIMS कैंपस गैंग का खुलासा

बिलासपुर रेंज पुलिस के लिए तैयार किया गया ‘सशक्त’ मोबाइल एप अब वाहन चोरों पर भारी पड़ रहा है। महज 10 दिनों की सघन जांच में 49 चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद की गईं। इनमें 25 वाहन अकेले बिलासपुर जिले से मिले हैं। ड्रिंक एंड ड्राइव चेकिंग के दौरान इसी एप की मदद से एक ऐसे गिरोह तक पहुंच बनाई गई, जो सिम्स बिलासपुर परिसर के आसपास से बाइक चोरी करता था।

शराब जांच से खुली चोरी की परत

देर रात वाहन जांच के दौरान पुलिस ने एक नाबालिग को संदिग्ध हालत में बाइक चलाते रोका। नंबर प्लेट को ‘सशक्त एप’ में दर्ज करते ही पता चला कि वाहन चोरी का है और इसकी रिपोर्ट पहले से थाने में दर्ज है। इसके बाद पूछताछ में पूरे गिरोह की जानकारी सामने आई। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि चोरी की एक बाइक बहतराई स्थित अटल आवास क्षेत्र में बेची गई थी। पुलिस ने मामले में तीन लोगों पर कार्रवाई की है।

सख्त निर्देश: हर दिन संदिग्ध वाहनों की जांच

SSP रजनेश सिंह ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि चोरी की हर बाइक का डेटा एप पर अपडेट किया जाए। वहीं ट्रैफिक एडिशनल एसपी रामगोपाल करियारे ने प्रत्येक चेकिंग पॉइंट पर तैनात जवानों को रोजाना कम से कम 10 संदिग्ध वाहनों की जांच सुनिश्चित करने को कहा है। पुलिस का अनुमान है कि सख्ती से अमल होने पर रोज 300 से अधिक वाहनों की स्क्रीनिंग संभव है।

गश्त और नाइट चेकिंग में बढ़ी सक्रियता

  • पेट्रोलिंग टीमों को बीट स्तर पर वाहन सत्यापन के निर्देश

  • अड्डेबाजी और नशे में वाहन चलाने वालों पर विशेष अभियान

  • ड्रिंक एंड ड्राइव के साथ चोरी की बाइक की समानांतर जांच

आम जनता भी कर सकती है मदद

‘सशक्त सीजी पुलिस’ एप अब सिर्फ पुलिस तक सीमित नहीं है। आम नागरिक भी इसे डाउनलोड कर सकते हैं।

कैसे करें उपयोग?

  • प्ले स्टोर से एप इंस्टॉल करें

  • वाहन नंबर दर्ज करें

  • तुरंत पता चलेगा – चोरी, संदिग्ध या लावारिस स्थिति

  • पब्लिक मॉड्यूल से सीधे पुलिस को सूचना भेजें

डिजिटल डाटाबेस से मौके पर सत्यापन

पहले चोरी की गाड़ी की पहचान में कई दिन लग जाते थे। अब लाइव डिजिटल रिकॉर्ड के कारण मौके पर ही स्थिति स्पष्ट हो जाती है। जिला बदलने पर भी वाहन का रिकॉर्ड आसानी से मिल जाता है, जिससे अंतरजिला गिरोहों पर लगाम कसने में मदद मिल रही है।

क्यों खास है यह पहल?

  • रियल-टाइम वाहन वेरिफिकेशन

  • कागजी प्रक्रिया की जरूरत खत्म

  • चोरी और लावारिस वाहनों का केंद्रीकृत डेटा

  • पुलिस और जनता की संयुक्त भागीदारी

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल टेक्नोलॉजी के उपयोग से वाहन चोरी के मामलों में तेजी से कमी लाई जा सकती है।

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