मानहानि विवाद: हिमंता सरमा ने ठोका 500 करोड़ का दावा, भूपेश बोले- पहले संपत्ति की जांच कराएं
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच आरोप-प्रत्यारोप अब कानूनी लड़ाई में बदल गए हैं। सरमा ने बघेल समेत कांग्रेस नेताओं जितेंद्र सिंह और गौरव गोगोई के खिलाफ 500 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया है।
यह विवाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए उस आरोप से जुड़ा है, जिसमें मुख्यमंत्री और उनके परिवार पर कथित तौर पर करीब 12,000 बीघा जमीन पर कब्जा करने का दावा किया गया था।
सोशल मीडिया पर दी जानकारी
सीएम सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया कि उनके खिलाफ जानबूझकर झूठे और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाए गए, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी आधार पर उन्होंने सिविल और आपराधिक मानहानि की कार्रवाई शुरू की है।
उनके मुताबिक, राजनीतिक मतभेद अलग बात है, लेकिन बिना प्रमाण सार्वजनिक मंच से आरोप लगाना कानून के दायरे में आता है।

भूपेश बघेल का पलटवार
दूसरी ओर, भूपेश बघेल ने कहा कि मुकदमा दायर करने से पहले मुख्यमंत्री को आरोपों की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि 12,000 बीघा जमीन का मुद्दा सामने आया है, तो इसकी सच्चाई स्पष्ट करने के लिए समिति गठित की जानी चाहिए थी।
बघेल ने कहा कि कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने जो सवाल उठाए हैं, उनका जवाब देने के बजाय कानूनी कार्रवाई करना उचित नहीं है।
9 फरवरी से शुरू हुई प्रक्रिया
सीएम सरमा के अनुसार, 9 फरवरी 2026 को कानूनी कार्रवाई की शुरुआत की गई। उनका कहना है कि प्रेस वार्ता में दिए गए बयान पूरी तरह तथ्यहीन और उनकी छवि धूमिल करने वाले थे, इसलिए अदालत का दरवाजा खटखटाया गया।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
मामले की शुरुआत 4 फरवरी को गुवाहाटी में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस से हुई। असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने दावा किया था कि पार्टी की आंतरिक जांच में मुख्यमंत्री और उनके परिजनों द्वारा बड़े पैमाने पर भूमि कब्जे का मामला सामने आया है।
सीएम सरमा ने इन आरोपों को “पूरी तरह झूठा और बदनाम करने की साजिश” बताया। उन्होंने कहा कि अगर किसी के पास सबूत हैं तो उन्हें अदालत में पेश करना चाहिए।
राजनीतिक तनातनी तेज
इस विवाद के बीच असम की राजनीति में सरमा और गोगोई के बीच टकराव और गहरा गया है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में गोगोई और उनकी पत्नी के विदेशी संपर्कों को लेकर भी सवाल उठाए थे।
कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार के पास अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण नहीं है।