Jharkhand : आदित्य साहू बने झारखंड बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष, फैसले के सियासी मायने

Jharkhand : आदित्य साहू बने झारखंड बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष, फैसले के सियासी मायने

रांची : झारखंड भारतीय जनता पार्टी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल गया है। राज्यसभा सांसद आदित्य साहू को पार्टी ने प्रदेश संगठन की कमान सौंपी है। वे इससे पहले झारखंड बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे थे। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके अध्यक्ष चुने जाने की औपचारिक घोषणा कर दी गई।

आदित्य साहू की नियुक्ति को केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में स्पष्ट राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

ओबीसी वोट बैंक पर बीजेपी की रणनीतिक चाल

आदित्य साहू के अध्यक्ष बनने के साथ ही यह साफ हो गया है कि बीजेपी झारखंड में ओबीसी वर्ग को केंद्र में रखकर राजनीति को आगे बढ़ाना चाहती है। राज्य में ओबीसी आबादी 50 प्रतिशत से अधिक मानी जाती है, जिसका असर चुनावी समीकरणों पर साफ दिखता है।

बीजेपी पहले ही उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में ओबीसी नेतृत्व को आगे बढ़ा चुकी है। अब झारखंड में यह कदम उसी रणनीति का विस्तार माना जा रहा है।

आदिवासी-ओबीसी संतुलन साधने की कोशिश

फिलहाल झारखंड बीजेपी में आदिवासी नेतृत्व का चेहरा बाबूलाल मरांडी हैं, जो विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। वहीं संगठन की बागडोर ओबीसी नेता आदित्य साहू को सौंपकर पार्टी ने सामाजिक संतुलन साधने का प्रयास किया है।

राज्य में आदिवासी आबादी लगभग 25 प्रतिशत है और बीजेपी लंबे समय से आदिवासी व ओबीसी नेतृत्व के बीच संतुलन बनाकर राजनीति करती रही है।

जमीनी कार्यकर्ता से प्रदेश अध्यक्ष तक का सफर

आदित्य साहू को संगठन से जुड़ा समर्पित कार्यकर्ता माना जाता है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत बूथ स्तर से की थी। इसके बाद वे पार्टी में

  • महासचिव

  • उपाध्यक्ष

  • कार्यकारी अध्यक्ष

जैसे अहम पदों पर काम कर चुके हैं। पलामू और कोल्हान जैसे क्षेत्रों में संगठनात्मक अनुभव होने के कारण उनका कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद रहा है।

युवाओं और संगठन पर रहेंगी निगाहें

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आदित्य साहू अपनी टीम में किस तरह के चेहरे शामिल करते हैं। पार्टी सूत्रों का मानना है कि वे युवाओं को संगठन में अधिक अवसर दे सकते हैं। झारखंड में लगातार दो विधानसभा चुनाव हार चुकी बीजेपी के लिए संगठन को फिर से मजबूत करना, कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरना और चुनावी रणनीति को धार देना नई नेतृत्व टीम के सामने बड़ी चुनौती होगी।

यह भी पढ़ें : छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने संगठन को दी नई धार

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