गोंडवाना महोत्सव रायपुर 2025: बीटीआई ग्राउंड में निःशुल्क प्रवेश, संस्कृति और संगीत का शानदार उत्सव

राजधानी रायपुर के बीटीआई ग्राउंड में मां पीतांबरा जन सेवा समिति द्वारा आयोजित 17 दिवसीय गोंडवाना राष्ट्रीय आजीविका एवं सांस्कृतिक कला महोत्सव ने लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर लिया है। मंगलवार की शाम आयोजित छत्तीसगढ़ी वेशभूषा एवं सांस्कृतिक प्रस्तुति ने पूरे माहौल को जीवंत कर दिया।

छत्तीसगढ़ी वेशभूषा और रैंप वॉक ने जीता दिल

कार्यक्रम में कलाकार जब छत्तीसगढ़ी गेटअप में मंच पर उतरे तो दर्शकों की तालियों ने पूरा परिसर गुंजा दिया।
सभी प्रतिभागियों ने छत्तीसगढ़ी गीतों पर रैंप वॉक कर संस्कृति को बढ़ावा देने का संदेश दिया।

संगीत और रंगमंच का मनोरम मेल

बॉलीवुड और छत्तीसगढ़ी संगीत की मधुर प्रस्तुतियों ने शाम को बेहद खास बना दिया। शहर के कई लोकप्रिय सिंगर्स ने मंच से बेहतरीन नगमे पेश किए, जिससे माहौल और भी खुशनुमा हुआ।

महोत्सव में रोज़ाना हजारों की भीड़

महोत्सव के आयोजक वैभव सिंह सिसोदिया और सौरभ सिंह सिसोदिया के मुताबिक हर दिन अलग-अलग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क होने की वजह से भी लोग बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।

मेले में उपलब्ध सुविधाएँ:

  • हुनरमंद कारीगरों के स्टॉल

  • घरेलू उपयोग की वस्तुएँ

  • आकर्षक कलाकृतियाँ

  • बच्चों के लिए मनोरंजन जोन

  • शॉपिंग और सांस्कृतिक कार्यक्रम एक ही जगह

गोंडवाना महोत्सव 14 दिसंबर तक जारी रहेगा

आमजन के लिए कला, संस्कृति और मनोरंजन का अनूठा संगम इस मेले में देखने को मिल रहा है।
यह महोत्सव लगातार शहरवासियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बना हुआ है।

गोंडवाना महोत्सव 2025 में सुरों की रंगीन शाम

मंगलवार की शाम संगीत से सजी हुई रही। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. एन.के. निषाद की प्रस्तुति “घर घर दीया माता” से हुई, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय कर दिया।

इसके बाद कई कलाकारों ने अपनी-अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीता:

मुख्य प्रस्तुतियाँ

  • श. तारा बोरकर – “अरपा पैरी के धार”

  • हेमंत तिवारी – “चांद सी महबूबा हो मेरी कब”

  • योगिता जी – “दिल तो है दिल”

  • सरोज जी – “बाँहों में तेरी मस्ती के झोके”

  • सुबोध फ्रैंकलिन – “प्यार के इस खेल में”, “गोरे रंग पे…”

  • सारिका वर्मा – “शायद मेरी शादी का ख्याल”

हर प्रस्तुति पर दर्शकों ने जमकर उत्साह दिखाया। कार्यक्रम देर रात तक चला और महोत्सव ने फिर से साबित कर दिया कि गोंडवाना की धरती कला और संस्कृति का केंद्र है।

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