CG News: छत्तीसगढ़ में 2100 करोड़ का शराब घोटाला: ACB-EOW की बड़ी कार्रवाई, पूर्व मंत्री कवासी लखमा के करीबी रडार पर
CG News : छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। शनिवार सुबह भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की संयुक्त टीमों ने राज्यभर में एक साथ 15 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की। छापों का सीधा संबंध पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और उनके करीबी सहयोगियों से जोड़ा जा रहा है। यह मामला 2100 करोड़ रुपए से अधिक के आर्थिक घोटाले से जुड़ा है, जो 2019 से 2022 के बीच राज्य की सरकारी शराब दुकानों में अवैध बिक्री और डुप्लीकेट होलोग्राम के माध्यम से अंजाम दिया गया।
छापेमारी कहां-कहां हुई?
ACB-EOW की टीमें निम्नलिखित शहरों में सक्रिय रहीं: रायपुर: देवेंद्र नगर स्थित कांग्रेस नेता जी नागेश्वर राव और पूर्व पार्षद प्रत्याशी जी श्रीनिवास राव के घर छापे संतोषी नगर: कमलेश नहाटा के निवास पर दस्तावेजों की जांच दंतेवाड़ा: कांग्रेस नेता राजकुमार तामो के घर कार्रवाई सुकमा: चार स्थानों पर छापेमारी, जिनमें पेट्रोल पंप और हार्डवेयर व्यवसायी शामिल अंबिकापुर: घोटाले में पहले से आरोपी धजाराम-विनोद कुमार फर्म के संचालकों के घर छापे
घोटाले का तानाबाना: कैसे हुआ 2100 करोड़ का घपला?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज प्राथमिकी में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच के मुताबिक: आईएएस अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के गठजोड़ ने एक संगठित “शराब सिंडिकेट” चलाया। यह सिंडिकेट कवासी लखमा के नेतृत्व में काम करता था, जिन्हें हर माह करीब 2 करोड़ रुपए कमीशन मिलता था। यह रकम कवासी लखमा के बेटे हरीश के मकान निर्माण और सुकमा के कांग्रेस भवन के लिए भी उपयोग की गई।
FL-10, FL-10A, FL-10B: कैसे किया गया लाइसेंस प्रणाली का दुरुपयोग?
शराब घोटाले में खास भूमिका निभाने वाले FL-10 सीरीज लाइसेंस के माध्यम से तीन स्तरों पर अवैध कमाई की गई: शराब डिस्टिलर्स से प्रति केस रिश्वत ली गई। कच्ची और अवैध देसी शराब की बेहिसाब बिक्री से मोटी कमाई हुई। FL-10A लाइसेंस धारकों से बाजार हिस्सेदारी सुनिश्चित कराने के लिए रिश्वत वसूली की गई। FL-10: विदेशी शराब की खरीदी हेतु लाइसेंस FL-10A: भारत के अन्य राज्यों से शराब लाकर राज्य सरकार को आपूर्ति FL-10B: राज्य के निर्माताओं से विदेशी ब्रांड की आपूर्ति हालांकि वितरण और भंडारण की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ बेवरेज कॉर्पोरेशन के पास ही रही, लेकिन लाइसेंस प्रणाली के माध्यम से नियंत्रण और पारदर्शिता को दरकिनार किया गया।