CG News : 2026 तक नक्सलवाद खत्म होगा: सरकार ने वार्ता को लेकर स्पष्ट किया रुख

CG News : 2026 तक नक्सलवाद खत्म होगा: सरकार ने वार्ता को लेकर स्पष्ट किया रुख

CG News : 2026 तक नक्सलवाद खत्म होगा: सरकार ने वार्ता को लेकर स्पष्ट किया रुख

CG News : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने की घोषणा के बाद से बस्तर सहित छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की कार्रवाइयां तेज हो गई हैं। इस बीच नक्सलियों ने सप्ताह भर के भीतर दूसरी बार सरकार से शांति वार्ता की अपील की है। हाल ही में नक्सली लीडर रूपेश द्वारा जारी एक पर्चे में कहा गया कि यदि सरकार सकारात्मक संकेत देती है, तो नक्सली पूर्ण युद्धविराम के लिए तैयार हैं।

सरकार का स्पष्ट रुख

छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रेस वार्ता में कहा कि सरकार वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन इसकी कुछ शर्तें हैं:मुख्यधारा में आना होगा।,बंदूक छोड़नी होगी।,किसी भी प्रकार की शर्त सरकार स्वीकार नहीं करेगी।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई नक्सली आत्मसमर्पण करता है—even अगर वह पिछले 5-6 सालों से संगठन से जुड़ा रहा हो—तो सरकार उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगी।

सरेंडर पॉलिसी और सुरक्षा की गारंटी

गृह मंत्री ने कहा, “जो भी व्यक्ति आत्मसमर्पण करना चाहता है, हम न सिर्फ बात करने को तैयार हैं, बल्कि उसे सुरक्षा भी देंगे।” उन्होंने नक्सलियों से अपील की कि वे किसी समिति का ज़िक्र कर रहे हैं तो उसे स्पष्ट करें, क्योंकि सरकार ने अभी तक शांति वार्ता के लिए कोई समिति गठित नहीं की है।

विजय शर्मा ने नक्सलियों को चेतावनी भी दी कि अगर वे हिंसा का रास्ता नहीं छोड़ते, तो उन्हें उसी भाषा में जवाब मिलेगा। उन्होंने कहा, “यह भारत है, यहां लोकतंत्र है, चीन नहीं। अगर बातचीत चाहिए तो भारत के संविधान को मानना होगा।”

VIR अभियान और जमीनी प्रयास

गृह मंत्री ने बताया कि सरकार VIR अभियान के जरिए गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद कर रही है और उन्हें बेहतर सेवाएं मुहैया करा रही है। उन्होंने दावा किया कि सरकार के पास अभी चार साल हैं और इस अवधि में नक्सलवाद पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया जाएगा।

नक्सलियों की स्वीकारोक्ति

इससे पहले नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी ने जारी एक पर्चे में स्वीकार किया था कि पिछले 15 महीनों में उनके 400 साथी मारे गए हैं। उन्होंने भी शांति वार्ता की इच्छा जताई थी, बशर्ते सुरक्षा बलों का ऑपरेशन रोका जाए। इस पर सरकार का रुख साफ है कोई शर्त नहीं मानी जाएगी।

सरकार का संदेश स्पष्ट है शांति वार्ता के दरवाजे खुले हैं, लेकिन संविधान, लोकतंत्र और अहिंसा की राह अपनानी होगी। नक्सलवाद के खात्मे के लिए यह निर्णायक दौर है, और आने वाले समय में इस पर असर साफ दिख सकता है।

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