CG News: मिड-डे मील पर हाईकोर्ट सख्त, 26 जिलों के बच्चों को मिलेट चिक्की से वंचित रखने पर सवाल
CG News: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में चल रही प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना यानी मिड-डे मील को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है. चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने पूछा कि जब बच्चों को पोषण बढ़ाने के लिए सप्ताह में तीन दिन मिलेट चिक्की देने का निर्णय लिया गया है, तो इसका लाभ सिर्फ 7 जिलों तक ही क्यों सीमित है.
26 जिलों के बच्चों को योजना से बाहर रखने पर सवाल
हाईकोर्ट ने पूछा कि बाजरा, कोदो-कुटकी से बनी 20 ग्राम मिलेट चिक्की योजना को पूरे प्रदेश में लागू क्यों नहीं किया गया. न्यायमित्र ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब सभी बच्चों की पोषण संबंधी जरूरतें समान हैं, तो बाकी 26 जिलों के लाखों विद्यार्थियों को इस सुविधा से वंचित रखना उचित नहीं है. उन्होंने इसे बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय बताया.
मीडिया रिपोर्ट के बाद शुरू हुई जनहित याचिका
स्कूलों में मिड-डे मील की व्यवस्था और अनियमितताओं से जुड़ी खबरों के बाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने मामले को गंभीरता से लिया. कोर्ट ने इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए जांच के लिए न्यायमित्र नियुक्त किया. न्यायमित्र को स्कूलों में योजना की वास्तविक स्थिति की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं, हाईकोर्ट के निर्देश के बाद मुख्य सचिव ने शपथ पत्र प्रस्तुत किया. इसमें बताया गया कि 18 जून 2026 को पीएम पोषण योजना को लेकर राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी. बैठक में शिक्षा, खाद्य, कृषि, वित्त, महिला एवं बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने हिस्सा लिया. योजना को बेहतर बनाने के लिए कई निर्णय लिए गए.
अब डिजिटल सिस्टम से होगी राशन की निगरानी
मुख्य सचिव ने बताया कि मिड-डे मील योजना में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए पुरानी कूपन व्यवस्था समाप्त कर दी गई है. अब पीएम पोषण पोर्टल के माध्यम से खाद्यान्न आवंटन और वितरण की डिजिटल निगरानी की जाएगी. स्कूलों के शिक्षक राशन प्राप्त होने के बाद ऑनलाइन डिजिटल पावती दर्ज करेंगे. जिलों और विकासखंडों के प्रदर्शन की जानकारी भी सार्वजनिक की जाएगी, हाईकोर्ट के सुझावों के बाद राज्य सरकार ने जिला मुख्यालयों और आसपास के क्षेत्रों में सेंट्रलाइज्ड किचन शुरू करने को मंजूरी दी है. वर्तमान में रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा और धमतरी के 786 स्कूलों में करीब 1 लाख 13 हजार 972 बच्चों को केंद्रीय रसोई से तैयार गर्म भोजन दिया जा रहा है.
रसोई व्यवस्था सुधारने पर भी जोर
सरकार ने स्कूलों की रसोई व्यवस्था सुधारने के लिए कई कदम उठाने की बात कही है. रसोई उपकरण खरीदने के बाद बची राशि से एलपीजी गैस कनेक्शन और स्टोव उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है. वहीं महिला स्व-सहायता समूहों को हरी सब्जियों और मसालों की जैविक खेती से जोड़ने की जिम्मेदारी कृषि विभाग को दी गई है.
12 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
मिड-डे मील योजना में सुधार और मिलेट चिक्की वितरण को लेकर हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी. अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार 26 जिलों के बच्चों को पोषण योजना का लाभ देने को लेकर क्या जवाब पेश करती है.