CG News: छत्तीसगढ़मा पर माओवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई-तेलंगाना सी: 20 माओवादी गिरफ्तार, बस्तर में विकास और शांति की ओर बढ़ते कदम
CG News: छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर माओवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे सघन अभियान के तहत एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर कार्रवाई के बाद तेलंगाना पुलिस ने शुक्रवार और शनिवार को मुलुगु जिले के विभिन्न क्षेत्रों से 20 हथियारबंद माओवादियों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तारी और बरामदगी:
तेलंगाना पुलिस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार गिरफ्तार माओवादियों के पास से भारी मात्रा में हथियार और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है, जिसमें शामिल हैं:
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3 इंसास राइफल
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4 एसएलआर
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1 थ्री नॉट थ्री राइफल
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2 जिंदा ग्रेनेड
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₹58,000 नकद
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कुल 28 आधुनिक हथियार
गिरफ्तार माओवादियों में PLGA बटालियन-1 का डिप्टी कमांडर कुंजाम लक्खा, पांच एरिया कमेटी सदस्य (मरीगला सुमती, मड़कम कोसी, पोड़ियम जोगी, माड़वी सीमा, मुचाकी रंजू) और अन्य 14 सक्रिय सदस्य शामिल हैं। ये माओवादी बुर्कापाल (2017), किस्टाराम (2018), मिनपा (2020), और टेकलगुड़ेम (2022) जैसे कई बड़े हमलों में शामिल थे।
बस्तर बदल रहा है:
बस्तर के चिंगावरम गांव का दृश्य अब पूरी तरह बदल चुका है। जिस क्षेत्र में कभी माओवादियों का डर बना रहता था, आज वहां सड़कें, बिजली, पानी, स्कूल और अस्पताल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह बदलाव राज्य सरकार की “नियद नेल्ला नार (आपका अच्छा गांव)” योजना का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ और तिरंगा यात्रा:
माओवाद के विरुद्ध सरकार द्वारा अपनाई गई सख्त नीति और “ऑपरेशन सिंदूर” की सफलता को दर्शाने के लिए शनिवार को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप ने चिंगावरम से तिरंगा यात्रा की शुरुआत की। यह यात्रा गादीरास होते हुए जिला मुख्यालय तक पहुंची।
इस अवसर पर 17 मई 2010 को माओवादियों द्वारा इसी गांव में एक यात्री बस को IED विस्फोट से उड़ाने की घटना को याद किया गया, जिसमें 15 जवान और 16 ग्रामीण मारे गए थे। उपमुख्यमंत्री शर्मा और मंत्री कश्यप ने उन बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवारजनों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना।
स्मृति स्मारक और सामुदायिक भवन की घोषणा:
सरकार द्वारा चिंगावरम में सामुदायिक भवन और बलिदानी जवानों व ग्रामीणों की स्मृति में एक भव्य स्मारक बनाए जाने की घोषणा की गई है। यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को उनकी कुर्बानी की याद दिलाएगा और बस्तर में हो रहे बदलाव का प्रतीक बनेगा।