CG News: छत्तीसगढ़ में अतिथि व्याख्याता नीति 2026 लागू, एक आवेदन से कई पदों पर मिलेगी पात्रता
CG News: छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा संचालनालय ने अतिथि व्याख्याता (संशोधित 2026) नीति लागू कर दी है. नई व्यवस्था का उद्देश्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षण, पुस्तकालय, खेलकूद और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों को सुचारु रूप से संचालित करना है. नई नीति के तहत भर्ती प्रक्रिया को पहले से अधिक सरल और व्यवस्थित बनाया गया है.
एक आवेदन से कई पदों के लिए मिलेगा मौका
नई नीति के अनुसार यदि किसी महाविद्यालय या विश्वविद्यालय में एक ही विषय के प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापक के कई पद रिक्त हैं, तो अभ्यर्थी को केवल एक आवेदन करना होगा. चयन विषयवार मेरिट सूची के आधार पर किया जाएगा और वरीयता के अनुसार पद आवंटित किए जाएंगे.
योग्यता के आधार पर होगी नियुक्ति
यदि नियमित पदों के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता वाले अभ्यर्थी उपलब्ध होंगे, तो अतिथि व्याख्याता, अतिथि ग्रंथपाल और अतिथि क्रीड़ा अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी. पात्र उम्मीदवार नहीं मिलने पर अतिथि शिक्षण सहायक, ग्रंथालय सहायक और क्रीड़ा सहायक की व्यवस्था की जाएगी. अनुभव प्रमाण पत्र केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को मिलेगा, जिन्होंने एक शिक्षा सत्र में कम से कम पांच महीने तक कार्य किया हो.
पीजी अभ्यर्थियों को मिलेगी पात्रता
अतिथि व्याख्याता, ग्रंथपाल और क्रीड़ा अधिकारी के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के निर्धारित मानकों के अनुसार योग्यता अनिवार्य होगी. वहीं अतिथि शिक्षण सहायक, ग्रंथालय सहायक और क्रीड़ा सहायक के लिए स्नातकोत्तर में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 55 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के लिए 50 प्रतिशत अंक आवश्यक होंगे.
मानदेय भी किया गया तय
नई नीति में विभिन्न पदों के लिए मानदेय भी निर्धारित किया गया है. अतिथि व्याख्याता को 2,000 रुपये प्रति कार्य दिवस, अधिकतम 50 हजार रुपये प्रतिमाह मिलेंगे. अतिथि ग्रंथपाल और क्रीड़ा अधिकारी को 1,600 रुपये प्रतिदिन, अधिकतम 40 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे. अतिथि शिक्षण सहायक को 1,400 रुपये प्रतिदिन, अधिकतम 35 हजार रुपये प्रतिमाह, जबकि ग्रंथालय सहायक और क्रीड़ा सहायक को 1,200 रुपये प्रतिदिन, अधिकतम 30 हजार रुपये प्रतिमाह का मानदेय मिलेगा.
नियमित कर्मचारियों की तरह करना होगा काम
नई व्यवस्था के तहत सभी अतिथि कर्मियों के लिए प्रतिदिन 7 घंटे कार्य करना अनिवार्य होगा. अध्यापन के साथ प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा, छात्रसंघ चुनाव, सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेल गतिविधियां, युवा उत्सव, आंतरिक मूल्यांकन, नैक से जुड़े कार्य, ट्यूटोरियल और रेमेडियल कक्षाओं जैसी जिम्मेदारियां भी निभानी होंगी, नीति के अनुसार प्रत्येक शिक्षण सत्र में 11 आकस्मिक अवकाश की सुविधा मिलेगी, जिस पर मानदेय देय होगा. वहीं पीएचडी अध्ययन और मातृत्व अवकाश के लिए अधिकतम 180 दिनों तक का अवैतनिक अवकाश दिया जा सकेगा. इससे उच्च शिक्षा संस्थानों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों के लिए कार्य व्यवस्था अधिक स्पष्ट और सुव्यवस्थित होने की उम्मीद है.