CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा झटका, आरक्षण रोस्टर विवाद के चलते 12,489 शिक्षकों की भर्ती का विज्ञापन रद्द
CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से प्रदेश के लाखों युवाओं और शिक्षा विभाग से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है, हाईकोर्ट के जस्टिस एके प्रसाद की बेंच ने प्रदेश में चल रही 12,489 शिक्षकों की भर्ती के आरक्षण रोस्टर को लेकर एक बेहद अहम और कड़ा फैसला सुनाया है, अदालत ने साल 2023 में जारी किए गए शिक्षक भर्ती के उस विज्ञापन को पूरी तरह रद्द कर दिया है, जिसके तहत पूरी चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही थी, इस भर्ती प्रक्रिया में 29 नवंबर 2012 की पुरानी आरक्षण अधिसूचना और उसके आधार पर तैयार किए गए मॉडल रोस्टर को लागू किया गया था, जिसे याचिकाकर्ताओं ने अदालत में चुनौती दी थी.
नौकरी कर रहे शिक्षकों को तुरंत नहीं हटाया जाएगा
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह स्पष्ट कर दिया है कि भले ही भर्ती का विज्ञापन रद्द कर दिया गया है, लेकिन पूरी प्रक्रिया को सिरे से खारिज नहीं किया जाएगा, साथ ही जो शिक्षक वर्तमान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और नौकरी कर रहे हैं, उन्हें भी फिलहाल तुरंत नौकरी से नहीं हटाया जाएगा, अदालत ने यह भी साफ किया है कि इन कार्यरत शिक्षकों की नियुक्ति और भविष्य में होने वाली उनकी पदोन्नति से जुड़ा अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मुख्य मामले के अंतिम निर्णय के अधीन ही होगा, इस राहत से पहले से कार्यरत शिक्षकों और उनके परिवारों को फिलहाल बड़ी राहत मिली है.
क्या था पूरा मामला
राज्य शासन ने 4 मई 2023 को सहायक शिक्षक, शिक्षक और लेक्चरर के हजारों पदों पर सीधी भर्ती के लिए छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मण्डल यानी व्यापमं के माध्यम से विज्ञापन जारी किया था, इस विज्ञापन में सरगुजा और बस्तर संभाग समेत कई अन्य जिलों के लिए एक विशेष आरक्षण रोस्टर तैयार किया गया था, इस रोस्टर के खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इसे चुनौती दी थी, याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क था कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 19 सितंबर 2022 को ही साल 2012 के 58% आरक्षण के नोटिफिकेशन और मॉडल रोस्टर को पूरी तरह गलत ठहराते हुए रद्द कर दिया था, इसके बावजूद सरकार ने पुराने नियमों के आधार पर नया भर्ती विज्ञापन जारी कर दिया.

निर्धारित सीमा से अधिक आरक्षण
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि इस भर्ती विज्ञापन में अनुसूचित जनजाति यानी एसटी वर्ग के लिए तय सीमा से कहीं ज्यादा यानी 60% से भी अधिक पदों को आरक्षित कर दिया गया था, आंकड़ों के मुताबिक ई-कैडर के 1,113 पदों में से 698 पद केवल एसटी वर्ग के लिए आरक्षित कर दिए गए थे, जो कुल पदों का लगभग 62.71% था, इसी तरह टी-कैडर के 4,659 पदों में से 3,105 पद यानी करीब 66.64% पद एसटी वर्ग के लिए आरक्षित थे, याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इस अत्यधिक आरक्षण के कारण अनारक्षित और अन्य सभी आरक्षित वर्गों के लिए पदों की संख्या काफी कम हो गई, जो नियमों के बिल्कुल विपरीत था.
पुरानी आरक्षण व्यवस्था और सुप्रीम कोर्ट का संदर्भ
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 29 नवंबर 2012 को अधिसूचना जारी कर कुल आरक्षण का दायरा बढ़ाकर 58% कर दिया था, जिसमें अनुसूचित जाति को 12%, अनुसूचित जनजाति को 32% और अन्य पिछड़ा वर्ग को 14% आरक्षण का प्रावधान किया गया था, हालांकि 19 सितंबर 2022 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस पूरी व्यवस्था को रद्द कर दिया था, जिसके बाद राज्य सरकार इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई थी, सुप्रीम कोर्ट ने 1 मई 2023 को पहले से चल रही भर्ती और प्रमोशन की प्रक्रिया को अंतिम फैसले के अधीन पूरा करने की अनुमति दी थी, लेकिन याचिकाकर्ताओं का पक्ष था कि रद्द की जा चुकी व्यवस्था के तहत नए सिरे से विज्ञापन जारी करना कानूनन सही नहीं था, जिसके बाद अब हाईकोर्ट ने यह बड़ा फैसला सुनाया है.
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