CG News : दहेज मृत्यु मामले में हाईकोर्ट का अहम फैसला, पति को 17 साल बाद मिली राहत
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दहेज मृत्यु से जुड़े एक पुराने मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पति को दोषमुक्त कर दिया है। न्यायमूर्ति रजनी दुबे की एकलपीठ ने वर्ष 2007 में ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को निरस्त कर दिया।
मामला बलौदाबाजार निवासी उदय भारती से जुड़ा है, जिनकी पत्नी सीमा भारती की 6 नवंबर 2006 को फांसी लगने से मौत हो गई थी। इस घटना के बाद ट्रायल कोर्ट ने पति को दहेज मृत्यु और प्रताड़ना का दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी। उक्त आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी।
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का गहन परीक्षण किया। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष न तो दहेज की ठोस मांग साबित कर सका और न ही मृत्यु से ठीक पहले की किसी क्रूरता को प्रमाणित कर पाया।
अदालत ने यह भी कहा कि गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खाते हैं। वहीं, स्वतंत्र गवाहों ने दंपती के बीच सामान्य वैवाहिक जीवन होने की पुष्टि की। इन परिस्थितियों में कोर्ट ने इस मामले को आत्महत्या का मामला माना, न कि दहेज हत्या का।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का संदर्भ लेते हुए हाईकोर्ट ने अपील स्वीकार की और ट्रायल कोर्ट द्वारा दिया गया दोषसिद्धि का आदेश रद्द कर दिया।