CG News : छत्तीसगढ़ में शराब खरीदना पड़ेगा भारी, नए वित्तीय वर्ष से बढ़ेगा खर्च

CG News : छत्तीसगढ़ में शराब खरीदना पड़ेगा भारी, नए वित्तीय वर्ष से बढ़ेगा खर्च

रायपुर : अगर आप छत्तीसगढ़ में शराब खरीदते हैं, तो आने वाला साल आपकी जेब पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला है। राज्य सरकार ने आबकारी नियमों में ऐसा बदलाव किया है, जिससे देसी, विदेशी और बीयर-तीनों श्रेणियों की कीमतों में इजाफा तय माना जा रहा है।

यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा, यानी नए वित्तीय वर्ष के पहले दिन से ही असर दिखने लगेगा।

सरकार ने क्या बदला है?

अब तक शराब पर टैक्स तय करने का तरीका अलग था, लेकिन नई व्यवस्था में सरकार ने कीमत के आधार पर कर लगाने का मॉडल अपनाया है।

सीधे शब्दों में कहें तो-

  • सस्ती शराब → कम टैक्स

  • महंगी शराब → ज्यादा टैक्स

यानी जो ब्रांड जितना प्रीमियम होगा, उसकी बोतल उतनी ही महंगी पड़ेगी।

किन-किन पर असर पड़ेगा?

नई आबकारी नीति के दायरे में अब सिर्फ विदेशी शराब ही नहीं, बल्कि:

  • देसी मदिरा

  • बीयर

  • रेडी-टू-ड्रिंक (RTD) अल्कोहल

भी शामिल कर लिए गए हैं। इन सभी पर अतिरिक्त शुल्क तय किया गया है, जिससे खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी होगी।

बोतल बदलेगी, लेकिन दाम नहीं घटेंगे

सरकार ने शराब की बिक्री के तरीके में भी बदलाव किया है। अब सरकारी दुकानों में शराब कांच की बोतल की जगह प्लास्टिक पैक में दी जाएगी।

प्रशासन का कहना है कि इससे:

  • ढुलाई आसान होगी

  • टूट-फूट कम होगी

  • सप्लाई सिस्टम सुधरेगा

हालांकि, टैक्स बढ़ने के कारण इसका फायदा उपभोक्ताओं को कीमत के रूप में मिलता नहीं दिख रहा।

टैक्स किस आधार पर लगेगा? (आसान भाषा में समझिए)

शराब पर टैक्स तय करने के लिए सरकार प्रूफ लीटर नाम की इकाई का इस्तेमाल करती है।

यह बोतल की मात्रा नहीं, बल्कि उसमें मौजूद शुद्ध अल्कोहल को मापता है।

उदाहरण:

  • प्रूफ लीटर क्या दर्शाता है? (सरल भाषा में)

शराब पर लगने वाला कर बोतल के आकार से नहीं, बल्कि उसमें मौजूद शुद्ध अल्कोहल की मात्रा से तय किया जाता है। इसी मात्रा को मापने के लिए प्रूफ लीटर शब्द का उपयोग किया जाता है।

मतलब साफ है-
किसी भी बोतल में अगर अल्कोहल की हिस्सेदारी ज्यादा है, तो उस पर टैक्स भी उसी अनुपात में अधिक लगेगा, चाहे बोतल का साइज समान ही क्यों न हो।

इस व्यवस्था का मकसद यह है कि कम अल्कोहल वाली और ज्यादा अल्कोहल वाली शराब पर अलग-अलग दरें लागू की जा सकें।

  • 1 लीटर शराब में 42.8% अल्कोहल → करीब 0.43 प्रूफ लीटर

इसी गणना के आधार पर टैक्स लगाया जाता है।

आम आदमी के लिए क्या बदलेगा?

  •  शराब की कीमतें बढ़ेंगी
  • प्रीमियम ब्रांड ज्यादा महंगे होंगे
  •  बीयर और देसी शराब भी सस्ती नहीं रहेंगी
  •  पैकेजिंग बदलेगी, लेकिन खर्च कम नहीं होगा

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