CG News: छत्तीसगढ़ के 85 आदिवासी बाहुल्य ब्लॉकों में 5 माह से नहीं मिला गुड़ और चना, 6.98 लाख राशनकार्ड धारक प्रभावित
CG News: बस्तर संभाग सहित छत्तीसगढ़ के 85 आदिवासी बाहुल्य ब्लॉकों के निवासियों को पिछले 5 महीनों से गुड़ और चना नहीं मिल पा रहा है, जबकि खरीदी के बाद यह सामग्री अक्टूबर 2025 से गोदामों में डंप है, इसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत वितरित किया जाना था, ताकि आदिवासी क्षेत्रों में कुपोषण दूर कर पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा सके.
6.98 लाख राशनकार्ड धारकों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
गुड़ और चना का वितरण नहीं होने से करीब 6.98 लाख राशनकार्ड धारकों को बाजार से महंगी दरों पर यह सामग्री खरीदनी पड़ रही है, इससे पहले उन्हें यह सामग्री मुफ्त या रियायती दरों पर मिल रही थी, जिससे उनकी दैनिक जरूरतें पूरी होती थीं.

योजना का उद्देश्य और प्रावधान
यह योजना वर्ष 2019 में पूर्ववर्ती शासनकाल के दौरान शुरू की गई थी,
योजना के तहत,
• प्रत्येक राशनकार्ड धारक को 2 किलो गुड़ निःशुल्क
• और 2 किलो चना ₹5 प्रति किलो की दर से
प्रति माह उपलब्ध कराया जाना था, इसका मुख्य उद्देश्य आदिवासी और गरीब वर्ग को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है.
वितरण में आ रही व्यावहारिक समस्याएँ
प्रदेश के 27 जिलों में चना और बस्तर क्षेत्र के बीपीएल राशनकार्ड धारकों को गुड़ दिया जाता है, रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, बलौदाबाजार जैसे मैदानी जिलों को छोड़कर अधिकांश आदिवासी जिलों में यह योजना लागू है, गुड़ और चना नहीं मिलने से लोगों को महंगी अरहर दाल खरीदनी पड़ रही है और गुड़ की जगह शक्कर का उपयोग करना पड़ रहा है, जिससे पोषण स्तर भी प्रभावित हो रहा है.
अलग-अलग शासनकाल में शुरू हुई योजनाएँ
• चना वितरण योजना भाजपा शासनकाल में रमन सरकार द्वारा शुरू की गई थी,
• गुड़ वितरण योजना कांग्रेस शासनकाल में प्रारंभ हुई,
दोनों योजनाओं का उद्देश्य आदिवासी और गरीब परिवारों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना रहा है.
जल्द शुरू होगा वितरण
इस संबंध में नान (NAN) की एमडी इफ्फत आरा ने बताया कि, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गुड़ और चना का वितरण जल्द शुरू किया जाएगा, संबंधित दुकानों तक सामग्री पहुंचाई जा रही है, कुछ तकनीकी कारणों से वितरण में विलंब हुआ है.
सवाल जस का तस
गोदामों में महीनों से डंप सामग्री होने के बावजूद वितरण में देरी ने प्रशासनिक व्यवस्था, निगरानी तंत्र और खाद्य सुरक्षा योजनाओं की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.