CG News: महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर का भारत प्रत्यर्पण, UAE की मांग खारिज
CG News: महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को भारत वापस लाने का रास्ता आसान नहीं था. उसकी कस्टडी को लेकर भारत और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE के बीच ओमान की अदालत में कानूनी लड़ाई चली. UAE दुबई में दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में उसे अपने देश ले जाना चाहता था, जबकि भारत महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उसकी वापसी की मांग कर रहा था. दोनों देशों की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद मस्कट कोर्ट ऑफ अपील ने 8 अक्टूबर 2026 को भारत के पक्ष में फैसला सुनाया.
फर्जी यात्रा दस्तावेज के मामले में ओमान में हुई थी गिरफ्तारी
सौरभ चंद्राकर को कथित तौर पर फर्जी यात्रा दस्तावेजों के इस्तेमाल के मामले में ओमान में गिरफ्तार किया गया था. इसकी जानकारी मिलने के बाद भारत ने 12 जुलाई 2026 को ओमान की अदालत में प्रत्यर्पण याचिका दाखिल की. इसके दो दिन बाद 14 जुलाई को UAE ने भी सौरभ को अपने यहां दर्ज मामले में वापस भेजने की मांग की. एक ही व्यक्ति की कस्टडी के लिए दोनों देशों की याचिकाएं आने के बाद अदालत ने दोनों मामलों की संयुक्त सुनवाई की.

UAE ने दुबई के मनी लॉन्ड्रिंग केस में मांगा था प्रत्यर्पण
UAE ने दुबई में दर्ज आपराधिक केस नंबर 18483/2026 के आधार पर सौरभ चंद्राकर का प्रत्यर्पण मांगा था. इस मामले में उस पर मनी लॉन्ड्रिंग से प्राप्त रकम का इस्तेमाल कथित तौर पर अवैध संगठनों को आर्थिक मदद देने के लिए करने का आरोप था. दुबई के लोक अभियोजन विभाग ने ओमान के लोक अभियोजन विभाग के अंतरराष्ट्रीय सहयोग विभाग के माध्यम से याचिका भेजी थी. इसके साथ गिरफ्तारी वारंट, केस का विवरण, संबंधित कानूनी प्रावधान और पहचान से जुड़े दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए थे.
भारत ने महादेव सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग केस का दिया हवाला
भारत ने सौरभ को महादेव ऑनलाइन बुक के जरिए कथित अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में वापस लाने की मांग की थी. भारतीय पक्ष ने रायपुर की PMLA विशेष अदालत में चल रहे केस नंबर RPZO/10/2022 का हवाला दिया. प्रत्यर्पण याचिका के साथ 29 जुलाई 2022 की छत्तीसगढ़ पुलिस की चार्जशीट, मामले से जुड़े साक्ष्य, सौरभ की कथित भूमिका के दस्तावेज और 4 सितंबर 2023 का गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट भी पेश किया गया. भारत ने ओमान की अदालत को निष्पक्ष सुनवाई और बचाव के सभी कानूनी अधिकार सुनिश्चित करने का भरोसा दिया था.
सौरभ ने भारतीय नागरिकता छोड़ने और वानुअतु का नागरिक होने का किया दावा
सुनवाई के दौरान सौरभ के वकील ने भारत और UAE, दोनों को प्रत्यर्पण नहीं करने की मांग की. बचाव पक्ष का दावा था कि सौरभ ने 2020 में दुबई स्थित भारतीय दूतावास में भारतीय नागरिकता छोड़ दी थी और अब वह वानुअतु का नागरिक है. वकील ने यह भी दलील दी कि कथित अपराधों का दोनों देशों की सीमा में होना साबित नहीं किया गया है. इसके अलावा UAE की अदालत में इसी आरोप से जुड़े मामले में सौरभ को बरी किए जाने का दावा करते हुए दुबई की अपीलीय अदालत के केस नंबर 271/2024 का फैसला भी पेश किया गया.
भारतीय दूतावास ने नागरिकता की आधिकारिक पुष्टि की
सौरभ की नागरिकता को लेकर दावों के बीच ओमान की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को मस्कट स्थित भारतीय दूतावास से आधिकारिक जानकारी मांगी. अदालत ने पासपोर्ट नंबर U3226032 के आधार पर पूछा कि सौरभ चंद्राकर भारतीय नागरिक है या नहीं. 30 अगस्त 2026 को भारतीय दूतावास ने राजनयिक माध्यम से जवाब दिया. पत्र क्रमांक 582 में दूतावास ने पुष्टि की कि सौरभ भारतीय नागरिक है और भारत में प्रत्यर्पण के लिए वांछित है. इसके बाद अदालत ने नागरिकता छोड़ने के दावे को स्वीकार नहीं किया.
ओमान की अदालत ने भारत की याचिका को दी प्राथमिकता
अदालत ने स्पष्ट किया कि वानुअतु की नागरिकता होने का दावा भी किसी दूसरे देश को प्रत्यर्पण किए जाने पर अपने आप रोक नहीं लगाता. इसके लिए ओमान के कानून में निर्धारित शर्तों का पालन जरूरी है. ओमान के प्रत्यर्पण कानून की धारा 11 के तहत आरोपी को वापस ले जाने वाले देश को यह आश्वासन देना होता है कि उस पर बताए गए अपराधों के अलावा किसी पुराने अपराध में मुकदमा नहीं चलाया जाएगा, ओमान की अनुमति के बिना उसे किसी तीसरे देश को नहीं सौंपा जाएगा और उसे निष्पक्ष सुनवाई का पूरा अधिकार मिलेगा. अदालत के अनुसार, भारत ने ये सभी आश्वासन दिए थे, जबकि UAE की याचिका में जरूरी कानूनी आश्वासन नहीं थे.
पहले आई भारत की याचिका, UAE की मांग हुई खारिज
ओमान के कानून की धारा 6 के तहत जब एक ही व्यक्ति को दो देश प्रत्यर्पण के लिए मांगते हैं, तो अदालत नागरिकता, अपराध की जगह, अपराधों की गंभीरता और याचिका दाखिल करने की तारीख जैसे पहलुओं पर विचार कर सकती है. अदालत ने पाया कि भारत की याचिका पहले दाखिल हुई थी और भारतीय नागरिकता की आधिकारिक पुष्टि भी हो चुकी थी. इन आधारों पर मस्कट कोर्ट ऑफ अपील ने भारत की प्रत्यर्पण याचिका स्वीकार कर ली और UAE की मांग खारिज कर दी.
ओमान में चल रहे दूसरे केस के कारण तत्काल नहीं हुआ था प्रत्यर्पण
भारत के पक्ष में फैसला आने के बावजूद अदालत ने सौरभ को तत्काल भारत भेजने का आदेश नहीं दिया था. इसकी वजह ओमान में उसके खिलाफ फर्जी यात्रा दस्तावेजों से जुड़े मामले की सुनवाई थी. आदेश के मुताबिक, सौरभ को मस्कट इंटरनेशनल एयरपोर्ट से ओमान छोड़ते समय पकड़ा गया था. इस मामले में सीब प्राइमरी कोर्ट में केस नंबर 14691/5100/2026 चल रहा था. ओमान के कानून के अनुसार, वहां चल रहे आपराधिक मुकदमे की सुनवाई और सजा की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रत्यर्पण किया जाना था.
1 नवंबर को भारत पहुंचा सौरभ
बाद में 1 नवंबर 2026 को CBI सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लेकर पहुंची. अगले दिन 2 नवंबर को उसे दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया. CBI ने पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए उसे रायपुर ले जाने की अनुमति मांगी, जिसके बाद अदालत ने दो दिन की ट्रांजिट रिमांड मंजूर की. सौरभ के वकील ने उसकी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए दलील दी कि ओमान से प्रत्यर्पण की मंजूरी ED के मनी लॉन्ड्रिंग केस में मिली थी, CBI के मामले में नहीं, राउज एवेन्यू कोर्ट ने सौरभ चंद्राकर को 4 नवंबर तक रायपुर की संबंधित विशेष अदालत में पेश करने का आदेश दिया. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी गिरफ्तारी को लेकर आगे का फैसला रायपुर की संबंधित विशेष अदालत करेगी. अब महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में पूछताछ और आगे की कानूनी प्रक्रिया इसी अदालत के समक्ष आगे बढ़ेगी.
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