CG News: एनआईए कोर्ट के फैसले के बाद राहुल गांधी से मिला कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल, कानूनी मदद और साजिश की जांच की मांग
CG News: झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में एनआईए (NIA) की विशेष अदालत द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद कांग्रेस नेताओं, शहीदों के परिजनों और घायलों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को नई दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की. इस अहम बैठक में अदालत द्वारा दिए गए निर्णय के साथ-साथ मामले में आगे की कानूनी रणनीति और हमले के पीछे की कथित राजनीतिक साजिश की विस्तृत जांच को लेकर गंभीर चर्चा हुई.
टीएस सिंहदेव ने जांच पर उठाए सवाल
मुलाकात के बाद छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि राहुल गांधी के सामने झीरम कांड से जुड़े कई महत्वपूर्ण और सार्थक पहलू रखे गए हैं. उन्होंने कहा कि जिन 10 आरोपियों को अदालत ने मौत की सजा सुनाई है, वे केवल धरातल पर हमले को अंजाम देने वाले मोहरे थे. जबकि हमले की साजिश में शामिल बड़े और मुख्य चेहरों की भूमिका की सही ढंग से जांच नहीं की गई और उन्हें फरार बताकर छोड़ दिया गया.
आगे की कार्रवाई के लिए मांगा सहयोग
सिंहदेव ने एनआईए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच एजेंसी ने हमले के पीछे के बड़े षड्यंत्र और साजिश वाले दृष्टिकोण को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया. उन्होंने बताया कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने और उच्च न्यायालय में आगे की विधिक प्रक्रिया को मजबूती से प्रस्तुत करने के लिए राहुल गांधी से कानूनी सलाह व सहयोग की मांग की गई है. इस पर राहुल गांधी ने भी पूरे मामले से जुड़े अतिरिक्त दस्तावेज और विस्तृत जानकारियां मांगी हैं.
प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे मौजूद
इस उच्चस्तरीय बैठक में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए. प्रतिनिधिमंडल में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम, टीएस सिंहदेव, अनीता योगेंद्र शर्मा, शिव सिंह ठाकुर, धनेंद्र साहू और उमेश पटेल प्रमुख रूप से मौजूद रहे. इनके साथ ही झीरम घाटी नरसंहार में शहीद हुए नेताओं के परिजन और इस घटना में गंभीर रूप से घायल हुए लोग भी अपनी बात रखने पहुंचे थे.
13 साल बाद आया फैसला
उल्लेखनीय है कि 25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में नक्सलियों ने कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ के काफिले पर घातक हमला कर दिया था, जिसमें शीर्ष कांग्रेस नेताओं समेत 29 से अधिक लोगों की जान चली गई थी. इस दर्दनाक घटना के लगभग 13 साल बाद जगदलपुर स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने मामले में गिरफ्तार सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उन्हें मृत्युदंड (फांसी की सजा) की सजा सुनाई है.