CG News: महासमुंद जिला अस्पताल में एक महीने से एक्स-रे फिल्म खत्म, मोबाइल से फोटो लेने को मजबूर मरीज
CG News: महासमुंद के मेडिकल कॉलेज सह जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली का एक और मामला सामने आया है. जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में करीब एक महीने से एक्स-रे फिल्म का स्टॉक खत्म है. एक्स-रे जांच की प्रक्रिया जारी है, लेकिन मरीजों को उसकी मूल फिल्म नहीं दी जा रही. ऐसे में मरीज और उनके परिजन एक्स-रे स्क्रीन की मोबाइल से तस्वीर खींचकर ले जाने को मजबूर हैं. सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों को हो रही है, जिन्हें दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जाता है या आगे विशेषज्ञ चिकित्सकों से उपचार कराना होता है.
रोजाना 70 से 100 एक्स-रे की जांच
अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में सामान्य दिनों में रोजाना करीब 70 से 100 एक्स-रे किए जाते हैं. हड्डियों में चोट, फ्रैक्चर, छाती, फेफड़ों और अलग-अलग बीमारियों की जांच के लिए बड़ी संख्या में मरीज यहां पहुंचते हैं. फिल्म की कमी के बावजूद जांच जारी है, लेकिन मरीजों को रिपोर्ट की हार्ड कॉपी नहीं मिल रही. उन्हें मॉनिटर पर दिखाई देने वाली एक्स-रे इमेज की मोबाइल से तस्वीर खींचकर घर लौटना पड़ रहा है.
चार बार मांग पत्र, फिर भी नहीं मिली फिल्म
एक्स-रे फिल्म की कमी को लेकर रेडियोलॉजी विभाग के तकनीकी कर्मचारियों ने संबंधित विभाग को चार बार लिखित मांग पत्र भेजा है. इसके बावजूद अब तक फिल्म की आपूर्ति नहीं हुई है. कर्मचारियों का कहना है कि एक्स-रे फिल्म की मांग काफी पहले भेजी जा चुकी है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से अब तक इस समस्या के समाधान के लिए ठोस पहल नहीं की गई है. दूसरे अस्पतालों में रेफर किए जाने वाले मरीजों के लिए स्थिति और गंभीर हो जाती है, क्योंकि कई बार डॉक्टर मूल एक्स-रे फिल्म देखने की मांग करते हैं.
मोबाइल फोटो से बीमारी समझना मुश्किल
चिकित्सकों के अनुसार डिजिटल एक्स-रे इमेज उपयोगी होती है, लेकिन मोबाइल कैमरे से स्क्रीन की तस्वीर लेने और मूल एक्स-रे फिल्म में काफी अंतर होता है. मोबाइल फोटो में रोशनी, कैमरे का कोण और रिजॉल्यूशन जैसी वजहों से कई बार बारीक संकेत स्पष्ट दिखाई नहीं देते. इससे हड्डी में मामूली दरार, फेफड़ों के संक्रमण या अन्य गंभीर बीमारी के संकेतों का आकलन प्रभावित हो सकता है. इसके अलावा मरीज के पास उपचार का स्थायी रिकॉर्ड भी नहीं रहता. पुराने एक्स-रे से बीमारी की स्थिति की तुलना, दूसरे विशेषज्ञ को दिखाने, बीमा या मेडिकल क्लेम और कानूनी दस्तावेजों के लिए भी मूल फिल्म उपयोगी होती है. फिल्म नहीं मिलने पर कुछ मरीजों को दोबारा एक्स-रे कराना पड़ सकता है.
निजी सेंटर जाने को मजबूर मरीज
अस्पताल में एक्स-रे फिल्म नहीं मिलने की वजह से मरीजों को निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है. खासकर रेफर किए गए मरीजों और तत्काल विशेषज्ञ उपचार की जरूरत वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है. एक मरीज ने बताया कि पैर में चोट लगने के बाद अस्पताल में एक्स-रे कराया था, लेकिन फिल्म नहीं मिली. वह मोबाइल में फोटो लेकर गांव गया, जहां डॉक्टर ने फिल्म होने पर स्थिति बेहतर समझ आने की बात कही. इसके बाद अब निजी सेंटर से दोबारा एक्स-रे कराने की नौबत आ गई है. वहीं, मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक एक्स-रे फिल्म छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन यानी सीजीएमएससी के रेट कॉन्ट्रैक्ट में है. सीजीएमएससी के अधिकारियों से चर्चा हुई है और जल्द ही फिल्मों की आपूर्ति होने की उम्मीद है. प्रबंधन का कहना है कि जब तक सीजीएमएससी से अनापत्ति नहीं मिलती, तब तक अस्पताल अपने स्तर पर फिल्म नहीं खरीद सकता. फिलहाल अस्पताल को सप्लाई का इंतजार है.