CG News: हल्दी में मिला खतरनाक लेड! छत्तीसगढ़ के 28% सैंपल फेल
CG News: खाने में रोजाना इस्तेमाल होने वाली हल्दी को लेकर सामने आए एक वैज्ञानिक अध्ययन ने चिंता बढ़ा दी है. एनपीजे साइंस ऑफ फूड में प्रकाशित रिसर्च में पूर्वी भारत के पांच राज्यों से हल्दी के नमूने जुटाकर उनमें लेड की मात्रा की जांच की गई. छत्तीसगढ़ में लिए गए 32 नमूनों में से 9 में सीसे की मात्रा भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक की 10 माइक्रोग्राम प्रति ग्राम सीमा से ज्यादा मिली. यानी जांचे गए नमूनों में करीब 28 फीसदी इस निर्धारित सीमा से ऊपर थे.
बिलासपुर और अंबिकापुर से लिए गए सैंपल
अध्ययन के दौरान छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और अंबिकापुर से हल्दी के नमूने लिए गए थे. जांच में कुछ नमूनों में लेड की मात्रा बेहद ज्यादा पाई गई. रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक स्तर 5,255 माइक्रोग्राम प्रति ग्राम दर्ज किया गया. शोधकर्ताओं ने केवल सीसे की मौजूदगी तक जांच सीमित नहीं रखी, बल्कि क्रोमियम के स्तर को भी देखा. जिन नमूनों में लेड 10 माइक्रोग्राम प्रति ग्राम से अधिक था, उनमें क्रोमियम की मौजूदगी ने लेड क्रोमेट से मिलावट की आशंका को मजबूत किया.
हल्दी को चमकीला बनाने के लिए मिलावट का आरोप
रिसर्च के मुताबिक लेड क्रोमेट का इस्तेमाल हल्दी को अधिक चमकदार और पीला दिखाने के लिए किया जा सकता है. इससे खराब गुणवत्ता वाली या कीड़ों से प्रभावित हल्दी भी देखने में अच्छी लग सकती है. शोधकर्ताओं के अनुसार कुछ कारोबारियों द्वारा इसे उत्पाद की खराब स्थिति छिपाने और उसकी शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए जाने की जानकारी भी सामने आई है. इस तरह की मिलावट को सामान्य तौर पर सिर्फ देखकर पहचान पाना बेहद मुश्किल होता है और इसकी पुष्टि के लिए लैब टेस्ट जरूरी है.
सीसा शरीर के लिए क्यों चिंता की बात है
सीसा एक विषैली धातु है, जिसका लंबे समय तक शरीर में पहुंचना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इसका असर शरीर के अलग-अलग अंगों पर पड़ सकता है और बच्चों के मामले में जोखिम अधिक माना जाता है. अध्ययन में यह भी सामने आया कि संदिग्ध नमूने की जांच से लेकर परिणाम मिलने तक करीब दो सप्ताह का समय लग सकता है. यही वजह है कि खाद्य पदार्थों में ऐसी मिलावट की पहचान के लिए नियमित और प्रभावी जांच व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
पांच राज्यों में छत्तीसगढ़ तीसरे स्थान पर
अध्ययन में शामिल पांच राज्यों की तुलना करें तो 10 माइक्रोग्राम प्रति ग्राम से अधिक लेड वाले नमूनों के मामले में छत्तीसगढ़ तीसरे स्थान पर रहा. बिहार में 54 फीसदी और झारखंड में 42 फीसदी नमूने तय सीमा से ऊपर मिले, जबकि छत्तीसगढ़ में यह आंकड़ा 28 फीसदी रहा. उत्तर प्रदेश में 16 फीसदी और पश्चिम बंगाल में 13 फीसदी नमूने सीमा से ज्यादा पाए गए. हालांकि, यह आंकड़ा पूरे राज्य में बिकने वाली हल्दी का प्रतिनिधित्व नहीं करता, क्योंकि अध्ययन सीमित संख्या में लिए गए बाजार नमूनों पर आधारित है.
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