CG News: 15 साल पुराने मामले में रिटायर्ड रेंजर से वसूली का आदेश रद्द, पेंशन की रकम भी लौटाने के निर्देश
CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त वन अधिकारी बीरभद्र देवांगन को बड़ी राहत दी है, नारायणपुर वन मंडल के रिटायर्ड रेंजर से करीब 15 साल पुराने सागौन पौधारोपण मामले में 4,88,891 रुपए की वसूली का आदेश जारी किया गया था, जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने वन विभाग के इस आदेश को निरस्त कर दिया, कोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद रिकवरी की कार्रवाई तय कानूनी सिद्धांतों के अनुसार ही की जानी चाहिए.
15 साल पुराने पौधारोपण मामले पर हुई कार्रवाई
बीरभद्र देवांगन वर्ष 2010-11 में नारायणपुर सर्कल में रेंजर के पद पर पदस्थ थे, इसी दौरान सागौन पौधारोपण का काम कराया गया था, वन विभाग का आरोप था कि पौधारोपण अपेक्षित रूप से सफल नहीं हुआ और इससे शासन को आर्थिक नुकसान हुआ, हालांकि देवांगन का कहना था कि उनके सेवाकाल के दौरान इस कथित नुकसान को लेकर कोई विभागीय जांच नहीं की गई, इसके बावजूद सेवानिवृत्ति के बाद पुराने मामले में वसूली की कार्रवाई शुरू कर दी गई.
रिटायरमेंट के दो साल बाद मिला नोटिस
बीरभद्र देवांगन 31 जुलाई 2022 को सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे, इसके करीब दो साल बाद 5 अगस्त 2024 को वन विभाग ने उन्हें नोटिस जारी किया, नोटिस में वर्ष 2010-11 के सागौन पौधारोपण की असफलता का हवाला देते हुए शासन को हुए कथित नुकसान की जिम्मेदारी तय करने की बात कही गई, देवांगन ने विभाग को अपना जवाब भी दिया, लेकिन विभाग ने जवाब स्वीकार नहीं किया और आगे वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी.
4.88 लाख की रिकवरी का आदेश निरस्त
वन विभाग ने 8 अप्रैल 2025 को बीरभद्र देवांगन से 4,88,891 रुपए की वसूली का आदेश जारी किया, इसके खिलाफ उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पुराने मामले और सेवानिवृत्ति के बाद शुरू की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए गए, कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद वन विभाग के रिकवरी आदेश को निरस्त कर दिया और सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित विधिक सिद्धांतों के पालन की जरूरत बताई.
पेंशन से काटी रकम तो छह महीने में लौटानी होगी
हाईकोर्ट ने रिकवरी आदेश रद्द करने के साथ वन विभाग को स्पष्ट निर्देश भी दिए हैं, कोर्ट ने कहा कि यदि इस आदेश के आधार पर बीरभद्र देवांगन की पेंशन या किसी अन्य सेवानिवृत्ति लाभ से कोई राशि काटी या रोकी गई है, तो उसे वापस किया जाए, इसके लिए आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से छह महीने की समयसीमा तय की गई है, इस फैसले से रिटायर्ड रेंजर को पुराने मामले में बड़ी राहत मिली है.