CG News: छत्तीसगढ़ में जल्द पूर्णकालिक DGP की नियुक्ति, सुप्रीम कोर्ट और UPSC की सख्ती के बाद जल्द फैसला संभव
CG News: छत्तीसगढ़ में जल्द ही पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति हो सकती है। राज्य में प्रभारी DGP अरुण देव गौतम और IPS हिमांशु गुप्ता इस दौड़ में शामिल हैं, लेकिन अरुण देव गौतम का पलड़ा भारी माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट और UPSC की सख्ती
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और UPSC का नोटिस समय-सीमा पार करने के बाद राज्य सरकार पर नियुक्ति के लिए दबाव बढ़ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 2006 और 2026 के आदेशों में स्पष्ट किया है कि किसी भी राज्य में ‘प्रभारी’ DGP की नियुक्ति नहीं होनी चाहिए।
अरुण देव गौतम का प्रोफेशनल करियर
अरुण देव गौतम उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले हैं। उन्होंने एमए, एमफिल की डिग्री हासिल की और 1992 बैच के आईपीएस बने। उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक, भारतीय पुलिस पदक और संयुक्त राष्ट्र पुलिस पदक मिल चुके हैं।
उनका करियर चुनौतीपूर्ण जिलों और विभागों में रहा है। उन्होंने बिलासपुर, कोरिया, रायगढ़, जशपुर, राजनंदगांव और सरगुजा जिले के एसपी के रूप में सेवाएं दी हैं। इसके अलावा वे बस्तर IG और बिलासपुर रेंज IG भी रह चुके हैं।
नक्सली प्रभावित क्षेत्रों का अनुभव
अरुण देव गौतम ने 2009 में राजनंदगांव नक्सली हमले के बाद जिले का एसपी बनकर कार्य किया। झीरम कांड के बाद बस्तर में IG के रूप में जिम्मेदारी संभाली और चुनाव में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में राज्य DGP नियुक्तियों के लिए मार्गदर्शक ढांचा तय किया था। इसके अनुसार:
• राज्य सरकार UPSC द्वारा सूचीबद्ध 3 सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से DGP का चयन करे।
• चयनित अधिकारी को कम से कम 2 साल का कार्यकाल पूरा करना होगा।
• DGP बनने के लिए 30 साल की सेवा जरूरी है, लेकिन छोटे राज्यों में यह 25 साल भी मान्य है।
राज्य सरकार का अगला कदम
UPSC ने 13 मई 2025 को अरुण देव गौतम (1992 बैच) और हिमांशु गुप्ता (1994 बैच) का पैनल भेजा था। अब सुप्रीम कोर्ट और UPSC की सख्ती के बाद सरकार जल्द पूर्णकालिक DGP की नियुक्ति का निर्णय ले सकती है।