कांग्रेस का पलटवार: 4 साल पहले अमित शाह ने खुद माना था नक्सलवाद में कमी, अब राजनीतिक कारणों से बदले जा रहे बयान

कांग्रेस का पलटवार: 4 साल पहले अमित शाह ने खुद माना था नक्सलवाद में कमी, अब राजनीतिक कारणों से बदले जा रहे बयान

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया वक्तव्यों पर कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष ने कहा कि गृहमंत्री मौजूदा समय में राजनीतिक दुर्भावना के चलते तथ्यात्मक सच्चाई से हटकर बयान दे रहे हैं, जबकि चार वर्ष पहले वे स्वयं तत्कालीन कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली की सराहना कर चुके हैं।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राज्य में कांग्रेस शासन के दौरान नक्सली गतिविधियों में लगातार गिरावट दर्ज की गई थी। पार्टी ने याद दिलाया कि 5 अप्रैल 2021 को छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान अमित शाह ने मीडिया के सामने यह स्वीकार किया था कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से नक्सलवाद पर प्रभावी नियंत्रण हुआ है।

नक्सली घटनाओं में ऐतिहासिक गिरावट का दावा

कांग्रेस के अनुसार उस अवधि में नक्सली घटनाओं में लगभग 80 प्रतिशत तक कमी आई थी। उस समय राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी नक्सलवाद को “पैकअप मोड” में बताया था, जिससे स्पष्ट था कि हालात तेजी से सामान्य हो रहे थे।

विश्वास-विकास-सुरक्षा की रणनीति का असर

कांग्रेस ने कहा कि भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में “विश्वास, विकास और सुरक्षा” की नीति को प्राथमिकता दी गई। नक्सल प्रभावित और दुर्गम इलाकों में नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए, सड़क और पुलों का तेजी से निर्माण हुआ और अबूझमाड़ जैसे क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को मजबूत किया गया।

इसके साथ ही सैकड़ों नए स्कूल खोले गए, राशन दुकानों और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया गया। 67 से अधिक प्रकार की वनोपज की सरकारी खरीदी शुरू होने से स्थानीय आदिवासी आबादी को आर्थिक संबल मिला और सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा।

600 से अधिक गांव नक्सल मुक्त घोषित

कांग्रेस का दावा है कि उनके शासनकाल में 600 से ज्यादा गांवों को नक्सल मुक्त घोषित किया गया था। प्रशासनिक पहुंच, रोजगार के अवसर और बुनियादी ढांचे के विकास से नक्सलियों का प्रभाव सीमित क्षेत्रों तक सिमट गया था।

पूर्ववर्ती नीतियों को नजरअंदाज करने का आरोप

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि वर्तमान में उन्हीं प्रयासों और नीतियों को दरकिनार कर राजनीतिक बयानबाजी की जा रही है, जबकि सच्चाई यह है कि नक्सलवाद पर नियंत्रण की मजबूत नींव पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में रखी गई थी।

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