CGMSC दवा खरीदी घोटाला: ईडी जांच तेज, 6 नए कारोबारी घेरे में, आगे और कार्रवाई के संकेत

CGMSC दवा खरीदी घोटाला: ईडी जांच तेज, 6 नए कारोबारी घेरे में, आगे और कार्रवाई के संकेत

रायपुर: छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (CGMSC) से जुड़े बहुचर्चित दवा और मेडिकल उपकरण खरीदी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। 660 करोड़ रुपये से जुड़े इस मामले में अब छह नए कारोबारियों और उनके सहयोगियों को जांच के घेरे में लिया गया है।

रिमांड के दौरान पूछताछ में सामने आए अहम सुराग

दुर्ग की मोक्षित कॉरपोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा से ईडी द्वारा रिमांड अवधि में की गई पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। जांच एजेंसी ने टेंडर प्रक्रिया, कथित कमीशन व्यवस्था, संदिग्ध सप्लाई और काले धन के लेनदेन से जुड़े सवालों पर विस्तार से पूछताछ की।

सूत्रों के मुताबिक, इन खुलासों के आधार पर आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव मानी जा रही हैं।

दस्तावेजों ने खोली फर्जीवाड़े की परतें

पूछताछ के दौरान ईडी ने आरोपी के सामने फर्जी बिलिंग, बैंक ट्रांजैक्शन और सप्लायर कंपनियों के नेटवर्क से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत किए। इन कागजातों से यह संकेत मिला है कि घोटाले में शामिल नेटवर्क काफी संगठित और सुनियोजित था।

ईडी अब मनी ट्रेल, बेनामी लेनदेन और संदिग्ध फाइनेंशियल चैनलों की बारीकी से जांच कर रही है।

EOW भी कर रही समानांतर जांच

इस पूरे मामले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) द्वारा भी समानांतर रूप से की जा रही है। शशांक चोपड़ा की ईडी रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उसे विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।

CGMSC अधिकारियों पर संरक्षण देने के आरोप

ईडी की जांच में CGMSC से जुड़े कई अधिकारियों पर आरोपी को संरक्षण देने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इनमें डॉ. अनिल परसाई, दीपक कुमार बांधे, बसंत कुमार कौशिक, कमलकांत पाटनवार और क्षिरोद रौतिया के नाम शामिल हैं। सभी फिलहाल न्यायिक हिरासत में रायपुर जेल में बंद हैं।

27 दिनों में 750 करोड़ की खरीदी, नियमों की अनदेखी

जांच एजेंसियों के अनुसार, तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों और आपूर्तिकर्ताओं की मिलीभगत से सिर्फ 27 दिनों के भीतर लगभग 750 करोड़ रुपये की दवाओं और मेडिकल उपकरणों की खरीदी की गई। आरोप है कि इस प्रक्रिया में नियमों को दरकिनार कर सरकार को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

आगे और बड़े खुलासों की संभावना

फिलहाल ईडी और ईओडब्ल्यू दोनों एजेंसियां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में इस घोटाले से जुड़े और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

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