CG News : नियमितीकरण और बाल वाटिका नियुक्तियों की मांग पर भड़के जूनियर शिक्षक, सड़कों पर उतरे हजारों शिक्षक

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CG News : नियमितीकरण और बाल वाटिका नियुक्तियों की मांग पर भड़के जूनियर शिक्षक, सड़कों पर उतरे हजारों शिक्षक

CG News : ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में लोअर पीएमजी स्क्वायर सोमवार को शिक्षकों की नाराजगी का केंद्र बन गया, जब हजारों जूनियर शिक्षकों ने दो सूत्रीय मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां, नारों की गूंज और सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग करते शिक्षकों का कहना है कि उनकी अनदेखी अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रदर्शन की मुख्य मांगें क्या हैं?

प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों की दो प्रमुख मांगें हैं:
1. नियमितीकरण की प्रक्रिया में तेजी – वित्तीय वर्ष 2023-24 में चयनित जूनियर शिक्षकों को अब तक नियमित नहीं किया गया है। शिक्षकों का आरोप है कि चयन के बाद भी वे संविदा पर कार्य कर रहे हैं, जिससे उन्हें स्थायित्व और लाभ नहीं मिल पा रहा है।
2. बाल वाटिका में नियुक्ति – शिक्षकों ने नव-स्थापित बाल वाटिका के लिए शीघ्र नियुक्तियों की मांग की है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत जो नई पहल की जा रही है, उसके लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की तत्काल आवश्यकता है।

NEP 2020 और ओडिशा की तैयारियां

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत देशभर में फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (FLN) पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रारंभिक स्तर पर बच्चों की नींव मजबूत करने के लिए बाल वाटिका की स्थापना की गई है। ओडिशा सरकार ने हर ग्राम पंचायत में गोदाबरिश आदर्श प्राथमिक स्कूल खोलने की योजना बनाई है, लेकिन शिक्षक नियुक्तियों की रफ्तार बेहद धीमी है।प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ देंगे। उनका कहना है कि गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति बेहद आवश्यक है।

सरकारी प्रतिक्रिया का इंतजार

अब तक राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार मांगों पर विचार किया जा रहा है।ओडिशा में जूनियर शिक्षकों का यह प्रदर्शन ना केवल उनकी समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित कर रहा है, बल्कि यह भी दिखा रहा है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सिर्फ नीतियां नहीं, बल्कि समयबद्ध क्रियान्वयन और योग्य शिक्षकों की भागीदारी भी जरूरी है।

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