CG News : छत्तीसगढ़ में अवैध प्लॉटिंग को रोकने के लिए सख्त नियमों का निर्धारण
CG News : छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पहली बार अवैध प्लॉटिंग को पूरी तरह से रोकने के लिए नए और सख्त नियम बनाए गए हैं। राज्य सरकार का दावा है कि इन नए नियमों के लागू होने के बाद अवैध प्लॉटिंग की शिकायतें पूरी तरह से खत्म हो जाएंगी। यह पहली बार होगा जब कलेक्टर गाइडलाइंस के अनुसार कृषि भूमि पर भी प्लॉटिंग की अनुमति दी जाएगी, लेकिन इसके लिए पहले शुल्क अदा करना होगा।
नए नियमों के तहत, अब किसी भी बिल्डर या कॉलोनाइजर को प्लॉटिंग की अनुमति तभी दी जाएगी जब वह पहले से तय करेगा कि प्लॉटिंग के किस हिस्से में कौन सा निर्माण होगा। इसके लिए बाउंड्रीवॉल बनाकर वहां बोर्ड भी लगाना होगा। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि निर्माण कार्य नियमानुसार और पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार हो, और साथ ही इसके साथ जुड़ी भूमि का गलत उपयोग रोका जा सके। इसके अलावा, अब हर प्लॉटिंग क्षेत्र में सड़कें भी समान रूप से बनाई जाएंगी। सड़क की लंबाई और चौड़ाई पहले से निर्धारित होगी, ताकि किसी भी बिल्डर या कॉलोनाइजर द्वारा सड़क की भूमि को बेचने का प्रयास न किया जा सके।
पहले क्या होता था?
पिछले कुछ वर्षों में कई शिकायतें आई थीं कि बिल्डरों या कॉलोनाइजर्स ने प्लॉटिंग के दौरान रोड और रास्ते की भूमि को भी बेच दिया, या फिर वे उन हिस्सों को बेच देते थे जहां क्लब, गार्डन या सामुदायिक भवन बनाने का वादा किया गया था। इसके अलावा, कई बार सड़क की चौड़ाई कम कर दी जाती थी, और खाली जमीन का उपयोग गलत तरीके से किया जाता था। इस प्रकार की धोखाधड़ी और गलत कामों के कारण उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
अब क्या होगा?
अब राज्य सरकार ने इन समस्याओं को सुलझाने के लिए नियमों में बदलाव किया है। किसी भी कॉलोनाइजर या बिल्डर को प्लॉटिंग करने के लिए बाउंड्रीवॉल बनानी होगी और निर्माण के लिए जगह निर्धारित करनी होगी। इसके अलावा, सभी निर्माणों की योजना और सड़क की चौड़ाई पहले से तय होगी। इस नए नियम के लागू होने से उपभोक्ताओं को यह स्पष्ट जानकारी मिलेगी कि वे कहां प्लॉट खरीद रहे हैं और वहां किस तरह के निर्माण किए जाएंगे। इसके साथ ही अगर कृषि भूमि पर प्लॉटिंग हो रही है, तो उसे भी कलेक्टर गाइडलाइंस के अनुसार आवासीय भूमि में बदलने के लिए शुल्क अदा करना होगा।
नए नियमों से मिलने वाले लाभ:
नए नियमों के तहत, अब किसी भी प्लॉटिंग क्षेत्र में 2 से 10 एकड़ तक की भूमि का प्लॉटिंग किया जा सकेगा। इसके अलावा, सड़क की चौड़ाई न्यूनतम 9 मीटर होगी और आंतरिक मार्ग की लंबाई कम से कम 8 मीटर होगी। सामुदायिक कार्यों के लिए प्लॉटिंग क्षेत्र में 5% जगह छोड़नी होगी और कम्यूनिटी हॉल और क्लब के लिए 2% जगह और व्यावसायिक क्षेत्र के लिए 3% जगह छोड़ी जाएगी। इसके अलावा, यदि प्लॉटिंग में कृषि भूमि शामिल है, तो कलेक्टर गाइडलाइंस के तहत उसे आवासीय भूमि में बदलने के लिए शुल्क लिया जाएगा।
कॉलोनाइजर्स के लिए लाभ:
इस नए प्रारूप का फायदा कॉलोनाइजर्स को भी होगा, क्योंकि उन्हें पहले से तय योजनाओं के तहत काम करना होगा और उनके नक्शे को प्रमाणित करने के लिए आवश्यक फोटो और जानकारी प्रदान करनी होगी। यदि कॉलोनाइजर किसी तरह की गड़बड़ी करता है या गलत जानकारी देता है, तो उस पर एफआईआर भी दर्ज की जा सकती है। रेरा के तहत भी ऐसी गड़बड़ी की शिकायत की जा सकती है और प्रोजेक्ट की खरीदी-बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
सरकार का दावा:
छत्तीसगढ़ के आवास और पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी का कहना है कि इन नए नियमों का उद्देश्य लोगों को किफायती आवास उपलब्ध कराना और अवैध प्लॉटिंग को पूरी तरह से खत्म करना है। यह कदम न केवल उपभोक्ताओं के हित में है, बल्कि इससे धोखाधड़ी की शिकायतों में भी कमी आएगी और लोग बिना किसी डर के प्लॉट खरीद सकेंगे।
छत्तीसगढ़ राज्य के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भूमि विकास और आवासीय निर्माण में पारदर्शिता और विश्वास बहाल करेगा। इन नए नियमों के साथ, सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि प्लॉटिंग और निर्माण योजनाएं पहले से तय और नियोजित हों, जिससे भविष्य में किसी भी तरह की अवैध गतिविधियां रोकी जा सकें।