CG News: नवा रायपुर में गरीबों के लिए बने आवास निजी समूह को सौंपे गए, हाउसिंग बोर्ड के फैसले पर सवाल
रायपुर: नवा रायपुर अटल नगर में आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के लिए तैयार किए गए सरकारी आवास अब निजी कारोबारी समूहों के कब्जे में जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल ने सेक्टर-16 में स्थित एलआईजी श्रेणी के दो पूरे आवासीय ब्लॉक एक साथ मेफेयर समूह को बेच दिए हैं।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजनाओं के तहत बनाए गए कुल 128 फ्लैट इस सौदे में शामिल हैं। इनका विक्रय लगभग 16 करोड़ रुपये में किया गया, यानी प्रति फ्लैट कीमत करीब 12.66 लाख रुपये बैठती है।
योजना की मंशा पर उठे सवाल
ईडब्ल्यूएस और एलआईजी वर्ग के मकान मूल रूप से ऐसे परिवारों के लिए तैयार किए जाते हैं, जिनकी आय सीमित होती है। इन आवासों पर शासन की ओर से सब्सिडी और रियायतें इसलिए दी जाती हैं ताकि जरूरतमंदों को सस्ती दरों पर घर मिल सके। ऐसे में पूरे आवासीय ब्लॉक का एक निजी होटल समूह को थोक में बेचा जाना सरकारी आवास नीति की भावना के विपरीत माना जा रहा है।
सैकड़ों फ्लैट अब भी खाली
सूत्रों के अनुसार सेक्टर-16 में बड़ी संख्या में आवास पहले ही बेचे जा चुके हैं, इसके बावजूद 400 से अधिक फ्लैट अभी भी खाली पड़े हैं। गृह निर्माण मंडल फरवरी माह से नई बुकिंग प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। इसी तरह सेक्टर-34 में भी थोक विक्रय के मामले सामने आए हैं, जबकि सेक्टर-27 में कई दुकानें अब तक अविक्रित हैं।
2025 में रिकॉर्ड बिक्री का दावा
गृह निर्माण मंडल के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में 4,689 संपत्तियों की बिक्री कर लगभग 1,022 करोड़ रुपये की आय अर्जित की गई। इनमें से करीब 70 प्रतिशत संपत्तियां कमजोर और निम्न आय वर्ग के लिए बनाई गई थीं। वन-टाइम सेटलमेंट योजना के तहत 30 प्रतिशत तक की छूट देकर 1,452 संपत्तियां बेची गईं, जिनकी कुल कीमत 220 करोड़ रुपये रही।
नियमों में बदलाव का हवाला
मंडल के अधिकारियों का कहना है कि इन फ्लैटों के लिए तीन बार विज्ञापन जारी किए गए, लेकिन अपेक्षित संख्या में खरीदार सामने नहीं आए। इसके बाद शासन स्तर पर नियमों में संशोधन कर अविक्रित संपत्तियों को थोक में बेचने की अनुमति दी गई।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मांग कम थी, तो पात्रता शर्तों में ढील, आसान किस्त व्यवस्था या अतिरिक्त सब्सिडी जैसे विकल्प अपनाए जा सकते थे। उनका कहना है कि गरीबों के लिए बनाए गए घरों का बड़े निजी समूहों को सौंपा जाना नीति और उद्देश्य-दोनों पर सवाल खड़े करता है।