ISRO को बड़ा झटका: PSLV-C62 मिशन असफल, इसरो को बड़ा झटका
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए साल 2026 की शुरुआत निराशाजनक रही। सोमवार को लॉन्च किया गया PSLV-C62 मिशन तकनीकी खराबी के कारण पूरा नहीं हो सका। प्रक्षेपण के शुरुआती चरण सामान्य रहे, लेकिन उड़ान के लगभग 6 मिनट 20 सेकंड बाद रॉकेट ने निर्धारित पथ से विचलन दिखाया, जिसके चलते मिशन को अधूरा घोषित करना पड़ा।
महत्वपूर्ण उपग्रह मिशन रह गया अधूरा
PSLV-C62 के जरिए डीआरडीओ के ‘अन्वेष (EOS-N1)’ सहित कुल 16 सैटेलाइट को कक्षा में स्थापित किया जाना था। इन उपग्रहों में 7 भारतीय और 8 विदेशी पेलोड शामिल थे, जिनका उपयोग सुरक्षा, रडार निगरानी और हाइपर-स्पेक्ट्रल इमेजिंग जैसे अहम उद्देश्यों के लिए किया जाना था।
तीसरे चरण में फिर आई तकनीकी दिक्कत
सुबह 10:18 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लॉन्च पैड से रॉकेट ने उड़ान भरी। पहले और दूसरे चरण में कोई समस्या नहीं आई, लेकिन तीसरे ठोस चरण के अंतिम हिस्से में तकनीकी खराबी सामने आई, जिसने पूरे मिशन को विफल कर दिया।
लगातार दूसरी असफलता, इतिहास में पहली बार
यह घटना इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि PSLV को तीसरे चरण में लगातार दूसरी बार विफलता का सामना करना पड़ा है। इससे पहले 18 मई 2025 को PSLV-C61 मिशन भी इसी चरण में असफल रहा था। अपने 32 वर्षों के इतिहास में पहली बार PSLV लगातार दो मिशनों में नाकाम हुआ है।
भारत का पहला असफल वाणिज्यिक स्पेस मिशन
इस मिशन से न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के तहत कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू समझौते जुड़े थे। ऐसे में इसे भारत का पहला वाणिज्यिक अंतरिक्ष मिशन माना जा रहा था, जो सफल नहीं हो सका। इसके साथ ही अंतरिक्ष में ईंधन भरने, AI आधारित पृथ्वी अवलोकन और PS-4 स्टेज के नियंत्रित समापन जैसे प्रयोग भी फिलहाल रुक गए हैं।
जांच के आदेश, बनेगी फेल्योर एनालिसिस कमेटी
इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा है कि मिशन से जुड़े सभी तकनीकी डेटा की गहन समीक्षा की जा रही है। फेल्योर एनालिसिस कमेटी (FAC) गठित कर दी गई है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति और सुधार तय किए जाएंगे।
लगातार दूसरी असफलता के बाद PSLV की विश्वसनीयता और पूर्व सुधारात्मक कदमों पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब इसरो की जांच रिपोर्ट और भविष्य की कार्ययोजना पर सबकी नजरें टिकी हैं।