CG News: PMGSY छत्तीसगढ़ घोटाला: 2225 करोड़ की सड़क परियोजना में अनियमितताएं
CG News: छत्तीसगढ़ के रायपुर में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के चतुर्थ चरण में कुल 2225 करोड़ रुपए की सड़क बनाने का प्रस्ताव है, विशेषकर आदिवासी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के 100 से अधिक आबादी वाले ग्रामों को बारामासी सड़क से जोड़ा जाएगा, केंद्र सरकार ने राज्य के 24 जिलों में 774 किमी सड़क निर्माण की स्वीकृति दी है, छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के मुख्य अभियंता केके कटारे ने 105 ग्रुप/पैकेज बनाकर निविदा आमंत्रित की, लेकिन इसमें केंद्र द्वारा जारी नियमों में कई फेरबदल किए गए.

निविदा में अनियमितताएं
• मानक निविदा दस्तावेज को बदलकर एफडीआर और बैंक गारंटी की शर्तों में फेरबदल किया गया,
• बिना स्पष्ट कारण, निविदा की अंतिम तिथि 30 जनवरी 2026 और ऑफलाइन शपथ पत्र की तिथि 2 फरवरी 2026 कर दी गई,
• नियमानुसार निविदाकार को कम से कम 3 कार्यदिवस देने होते हैं, लेकिन इसे केवल 1-2 दिन किया गया,
• सड़क निर्माण के लिए जमीन उपलब्धता आवश्यक है, जबकि कई स्वीकृत सड़क निर्माण के लिए जमीन नहीं है,
• निविदा में डामर प्लांट लीज और 90 किमी क्षेत्र जैसी शर्तें मनमाने ढंग से बदल दी गईं.
घोटाले की तैयारी और पैकेज का दुरुपयोग
• एलडब्ल्यूई प्रभावित जिलों के लिए संशोधन कर 0.5% को 0.2% और अन्य ब्लॉकों के लिए 15% को 33% कर दिया गया,
• 774 सड़कों के बड़े पैकेज को 30-40 करोड़ की लागत वाले तीन-चार ब्लॉकों में जोड़कर निविदा आमंत्रित की गई,
• यह मानक निविदा दस्तावेज के विपरीत किया गया ताकि चहेते ठेकेदारों को आसानी से निविदा मिल सके.
अधिकारियों और जांच की प्रतिक्रिया
मुख्य अभियंता केके कटारे ने कहा कि, नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया और केंद्र की गाइडलाइन का पालन किया गया है, हालांकि, ईओडब्ल्यू, एसीबी और लोक आयोग में उनके खिलाफ मामला दर्ज है, निविदाकार का पिछले 5 वर्षों का लिटिगेशन भरने का नियम भी लागू नहीं किया गया.
मांग और निष्कर्ष
• एलडब्ल्यूई प्रभावित क्षेत्रों में निर्माण के लिए भ्रष्टाचारयुक्त निविदाओं को रद्द करने और केंद्रीय शर्तों के अनुसार पुनः निविदा जारी करने की मांग की गई है,
• निविदा जारीकर्ता अधिकारी केके कटारे को हटाने का अनुरोध किया गया है.
यह मामला प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का गंभीर उदाहरण प्रस्तुत करता है, जिसमें आदिवासी और दूरदराज़ इलाकों के विकास पर भी असर पड़ सकता है