CG News: छत्तीसगढ़ विधानसभा में सेफ्टी ऑडिट, उद्योग हादसों और खाद-बीज की कमी पर गरमाई बहस, विपक्ष का वॉकआउट
CG News: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान उद्योगों में बढ़ती दुर्घटनाओं, सेफ्टी ऑडिट और प्रदेश में खाद-बीज की कमी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई. दोनों मुद्दों पर सदन का माहौल गर्म रहा. विपक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और बाद में हंगामा करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया.
उद्योगों में सुरक्षा व्यवस्था पर सरकार से सवाल
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने प्रदेश के उद्योगों में लगातार हो रही दुर्घटनाओं का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि कितने उद्योगों में सेफ्टी ऑडिट नहीं होने के कारण जांच की गई है और मौजूदा नियमों के अनुसार सेफ्टी ऑडिट कब अनिवार्य होता है. उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में अब तक 242 औद्योगिक दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं.
36 कारखानों में सेफ्टी ऑडिट होने का दावा
उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने जवाब देते हुए कहा कि अति खतरनाक श्रेणी के उद्योगों में नियमित रूप से सेफ्टी ऑडिट कराया जा रहा है. उन्होंने बताया कि अब तक 36 कारखानों का सेफ्टी ऑडिट पूरा किया जा चुका है. मंत्री के जवाब से असंतुष्ट डॉ. महंत ने कहा कि सरकार पूरी जानकारी सदन के सामने नहीं रख रही है. उन्होंने वेदांता संयंत्र दुर्घटना का उल्लेख करते हुए मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की.
वेदांता हादसे की जांच जारी, दोषियों पर होगी कार्रवाई
वेदांता संयंत्र हादसे को लेकर मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि मामला अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया में है. उन्होंने बताया कि दर्ज एफआईआर में कंपनी के निदेशक अनिल अग्रवाल का नाम भी शामिल है. मंत्री ने स्पष्ट कहा कि जांच पूरी होने के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा.
खाद और बीज की कमी पर सरकार को घेरा
शून्यकाल के दौरान विपक्ष ने प्रदेश में खाद और बीज की कमी का मुद्दा उठाते हुए स्थगन प्रस्ताव पेश किया. विपक्षी विधायकों ने आरोप लगाया कि किसान पर्याप्त खाद और बीज नहीं मिलने से परेशान हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं की अनदेखी कर रही है. इस मुद्दे पर सदन में जमकर नारेबाजी हुई.
वेल में पहुंचे विपक्षी विधायक, नियम के तहत हुए निलंबित
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने सरकार की ओर से जवाब दिया, लेकिन विपक्ष उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ. विरोध बढ़ने पर विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए सदन के गर्भगृह, यानी वेल, में पहुंच गए. विधानसभा की नियमावली के अनुसार वेल में प्रवेश करते ही विपक्षी सदस्य स्वतः निलंबित हो गए. इसके बाद विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया और कुछ देर तक सदन में हंगामे का माहौल बना रहा.