CG News: 38 साल पुराने दवा मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, राज्य सरकार की अपील खारिज
CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 38 वर्ष पुराने दवा प्रकरण में राज्य सरकार द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया है, न्यायमूर्ति राधाकिशन अग्रवाल की एकलपीठ ने निचली अदालत के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें साक्ष्यों के अभाव में आरोपियों को बरी किया गया था.
क्या था पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 1988 में खैरागढ़ स्थित पंडित मेडिकल स्टोर्स से लिए गए दवा नमूने से जुड़ा है, 16 मार्च 1988 को ड्रग इंस्पेक्टर ने पैराक्विन टैबलेट का नमूना लिया था, दवा को इंदौर की कंपनी एम/एस पारस फार्मास्यूटिकल प्रोडक्ट द्वारा निर्मित बताया गया था, भोपाल स्थित सरकारी विश्लेषक की रिपोर्ट में दवा मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाई गई, इसके बाद विक्रेता, थोक विक्रेता और निर्माता कंपनी के भागीदारों के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट, 1940 के तहत मामला दर्ज किया गया.
डोंगरगढ़ अदालत ने किया था बरी
वर्ष 2002 में डोंगरगढ़ की निचली अदालत ने सभी आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था, इसके खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि, दवा का नमूना लेने और जांच की प्रक्रिया तो नियमानुसार अपनाई गई थी, लेकिन आपूर्ति श्रृंखला (निर्माता से विक्रेता तक) को प्रमाणित करने में गंभीर खामियां थीं,
• जांच अधिकारी ने मूल बिल और दस्तावेज जब्त नहीं किए,
• अदालत में केवल फोटोकॉपी दस्तावेज प्रस्तुत किए गए,
• आरोपियों को सेंट्रल ड्रग्स लेबोरेटरी में दोबारा जांच कराने का वैधानिक अधिकार था, लेकिन दवा की अवधि समाप्त हो जाने के कारण यह संभव नहीं हो सका.
न्यायालय की टिप्पणी
अदालत ने स्पष्ट किया कि, आपराधिक मामलों में साक्ष्यों की मजबूती अत्यंत आवश्यक है, पर्याप्त और ठोस प्रमाण के अभाव में दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता, इस फैसले के साथ ही 38 साल पुराने इस दवा प्रकरण का कानूनी अध्याय समाप्त हो गया.