CG News: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में बिना परीक्षा के मार्कशीट में दिए ग्रेड, NEP के नए विषयों की परीक्षा ही नहीं हुई
CG News: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक नई लापरवाही सामने आई है. यहां कई स्कूलों में विद्यार्थियों की परीक्षा लिए बिना ही उनकी मार्कशीट में ग्रेड दर्ज कर दिए गए. मामला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत पाठ्यक्रम में शामिल किए गए नए विषयों से जुड़ा है. जांच में पता चला कि इन विषयों की परीक्षा आयोजित नहीं की गई, इसके बावजूद विद्यार्थियों को ग्रेड दे दिए गए.

तीसरी और छठवीं कक्षा में जोड़े गए थे नए विषय
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत शैक्षणिक सत्र 2024-25 में कक्षा तीसरी में शारीरिक शिक्षा और कला शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया था. वहीं कक्षा छठवीं में इन दोनों विषयों के साथ व्यावसायिक शिक्षा भी जोड़ी गई. इसके बाद मौजूदा सत्र में कक्षा चौथी और सातवीं में भी इन विषयों को लागू किया गया. इनके लिए करीब 66 लाख रुपये खर्च कर किताबें छपवाई गईं और जिलों तक पहुंचाई गईं.
शिक्षकों ने परीक्षा के बिना ही भर दिए ग्रेड
मामले की जांच के दौरान रायपुर, बलौदाबाजार, जांजगीर, बस्तर और दुर्ग सहित कई क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों की पड़ताल की गई. शिक्षकों से जब ग्रेडिंग की प्रक्रिया के बारे में पूछा गया तो कुछ ने बताया कि मार्कशीट में विषयों के नाम और ग्रेड भरने के कॉलम पहले से मौजूद थे. ऐसे में कॉलम खाली छोड़ने के बजाय उन्होंने ग्रेड दर्ज कर दिए. कुछ शिक्षकों ने यह भी कहा कि आठवीं तक विद्यार्थियों को फेल नहीं किया जाता, इसलिए परीक्षा नहीं होने से कोई फर्क नहीं पड़ता. कई शिक्षकों ने बिना लिखित परीक्षा के ग्रेड भरने की बात स्वीकार की.
तिमाही परीक्षा के टाइम टेबल में भी विषय शामिल नहीं
जांच में यह भी सामने आया कि मौजूदा सत्र में कक्षा चौथी और सातवीं की अगस्त-सितंबर में हुई तिमाही परीक्षा के टाइम टेबल में इन नए विषयों को जगह नहीं दी गई थी. इससे स्पष्ट हुआ कि इन विषयों की परीक्षा आयोजित नहीं की गई. वहीं पिछले शैक्षणिक सत्र में कक्षा तीसरी और छठवीं के विद्यार्थियों के लिए भी इन विषयों के पेपर नहीं हुए थे.
विभागीय तालमेल की कमी से सामने आई समस्या
इस पूरे मामले में विभागीय स्तर पर समन्वय की कमी सामने आई है. लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) का मानना था कि नए विषयों की परीक्षा की व्यवस्था भी अन्य विषयों की तरह जिला स्तर पर कराई जाएगी. दूसरी ओर जिला शिक्षा अधिकारी DPI से स्पष्ट निर्देश मिलने का इंतजार करते रहे. इस आपसी तालमेल की कमी के चलते परीक्षा आयोजित नहीं हो सकी और मार्कशीट में बिना परीक्षा के ग्रेड दर्ज कर दिए गए, DPI के एक अधिकारी के मुताबिक, जब नए विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है तो उनकी परीक्षा भी आयोजित की जानी चाहिए. अधिकारी ने शिक्षकों की ओर से दिए जा रहे तर्कों पर सवाल उठाए हैं. अब इस मामले ने सरकारी स्कूलों में नए विषयों के शिक्षण और मूल्यांकन की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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