छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: आबकारी विभाग के अपर आयुक्त आशीष श्रीवास्तव सस्पेंड, EOW-ACB ने पेश किया है पूरक आरोप पत्र
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में राज्य सरकार ने एक बड़ी और सख्त प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए आबकारी विभाग के अपर आयुक्त आशीष श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया है, आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW-ACB) द्वारा इस मामले में गहन जांच के बाद रायपुर की विशेष अदालत में उनके खिलाफ पूरक आरोप पत्र (सप्लीमेंट्री चार्जशीट) पेश किया गया था, जिसके आधार पर आबकारी विभाग ने शनिवार को उनके निलंबन का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है, जारी आदेश के मुताबिक यह निलंबन आगामी रूप से 14 अक्टूबर 2026 से प्रभावी माना जाएगा, निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय नवा रायपुर स्थित आबकारी आयुक्त कार्यालय निर्धारित किया गया है, और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा.
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आरोप सही पाए जाने पर हुई कार्रवाई
विभागीय आदेश के अनुसार, EOW-ACB में शराब घोटाले से जुड़े इस बहुचर्चित प्रकरण में अपराध क्रमांक 04/2024 दर्ज किया गया है, इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न गंभीर धाराओं के अंतर्गत जांच की जा रही है, जांच के दौरान तत्कालीन आबकारी उपायुक्त और वर्तमान अपर आयुक्त आशीष श्रीवास्तव के खिलाफ प्रथम दृष्टया संलिप्तता और आरोप सही पाए जाने की बात कही गई है, इसके बाद उनके खिलाफ 13 अक्टूबर 2026 को पूरक आरोप पत्र तैयार किया गया और 14 अक्टूबर को इसे रायपुर की विशेष अदालत में दाखिल कर दिया गया, जिसके बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियमों के तहत यह निलंबन कार्रवाई की गई है.
करीब 50 लोग हैं आरोपी
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के इस बहुचर्चित शराब घोटाले में ACB-EOW ने गत 17 जनवरी 2024 को एफआईआर (FIR) दर्ज की थी, प्रवर्तन निदेशालय (ED) से प्राप्त विस्तृत रिपोर्ट और जांच में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर इस पूरे मामले की कड़ियां जोड़ी गईं, इस प्रकरण में आबकारी विभाग के कई बड़े अधिकारियों समेत कुल 50 लोगों को आरोपी बनाया गया है, इससे पहले ED ने 11 जुलाई 2024 को ACB-EOW को एक गोपनीय रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें तत्कालीन आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी और अन्य प्रमुख लोगों की कथित भूमिका का पर्दाफाश किया गया था, इस रिपोर्ट में शराब कारोबार से अवैध कमीशन वसूलने, सरकारी दुकानों के जरिए बिना हिसाब की देशी शराब बेचने और डिस्टिलरी कंपनियों के बीच सिंडिकेट व कार्टेल बनाकर बाजार पर नियंत्रण करने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं, फिलहाल इस बड़े घोटाले में प्रशासनिक और कानूनी शिकंजा लगातार कसता जा रहा है.
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