CG News: हाईकोर्ट ने बदला फैमिली कोर्ट का फैसला, पत्नी की अर्जी पर मंजूर हुई तलाक की डिक्री
CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पत्नी अर्चना सिंह के पक्ष में तलाक की डिक्री पारित कर दी है. जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की डिवीजन बेंच ने अंबिकापुर फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पत्नी की तलाक की अर्जी खारिज कर दी गई थी. हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों और तथ्यों का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया था.
विवाह के बाद मारपीट और अभद्रता का आरोप
मामले के अनुसार अर्चना का विवाह 5 दिसंबर 2021 को आनंद कुमार गुप्ता के साथ हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुआ था. अर्चना ने आरोप लगाया कि शादी के कुछ ही समय बाद से पति उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट करने लगा था. जब उसने अपने परिजनों को इसकी जानकारी दी, तो पति ने उसके भाई और मां के साथ भी अभद्र व्यवहार किया. प्रताड़ना से तंग आकर वह अंबिकापुर स्थित अपने मायके लौट आई.
दहेज में एसी की मांग और जान से मारने की धमकी
अर्चना ने बताया कि अप्रैल 2022 में वह दोबारा अपने ससुराल गई, लेकिन पति के व्यवहार में कोई सुधार नहीं आया. पति द्वारा दहेज में एयर कंडीशनर (AC) की मांग की जाने लगी और मांग पूरी न होने पर गहने बेचने की धमकी दी गई. इसके साथ ही जान से मारने की धमकियां दिए जाने के बाद वह दोबारा मायके आ गई और पति से अलग रहने लगी.
फैमिली कोर्ट में पति के उपस्थित न होने पर एकतरफा कार्रवाई
पति से अलग रहने के बाद अर्चना ने फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की थी. फैमिली कोर्ट द्वारा विधिवत समन जारी किए जाने के बावजूद पति 16 जून 2023 को अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद उसके खिलाफ एकतरफा (Ex-Parte) कार्यवाही की गई थी. इसके बावजूद फैमिली कोर्ट ने पर्याप्त आधार न मानते हुए पत्नी की तलाक की अर्जी खारिज कर दी थी, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई.
अतिरिक्त साक्ष्य के रूप में पेश एफआईआर की प्रति अमान्य
अपील की सुनवाई के दौरान पत्नी की ओर से महिला थाना अंबिकापुर में 25 अगस्त 2026 को दर्ज एफआईआर की कॉपी को अतिरिक्त साक्ष्य के रूप में शामिल करने का आवेदन दिया गया था. हालांकि, हाईकोर्ट ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह स्पष्ट नहीं था कि ये दस्तावेज़ निचले न्यायालय के समक्ष रखे गए थे या नहीं, और न ही एफआईआर पर हुई आगे की जांच या न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम की कोई जानकारी उपलब्ध थी. इसके बावजूद पूर्व में पेश साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने तलाक की डिक्री मंजूर कर ली.