CG News: छत्तीसगढ़ के स्कूलों की बदहाल तस्वीर, 878 स्कूलों के पास नहीं अपना भवन, विधानसभा में हुआ खुलासा

CG News: छत्तीसगढ़ के स्कूलों की बदहाल तस्वीर, 878 स्कूलों के पास नहीं अपना भवन, विधानसभा में हुआ खुलासा

CG News: छत्तीसगढ़ के स्कूलों की बदहाल तस्वीर, 878 स्कूलों के पास नहीं अपना भवन, विधानसभा में हुआ खुलासा

CG News: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में भवनों की स्थिति को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है, विधानसभा के मानसून सत्र में स्कूल भवनों को लेकर पूछे गए सवाल पर शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने सदन में जानकारी दी है, जारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 878 स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास खुद का भवन नहीं है.

विधायक उमेश पटेल ने सदन में उठाया स्कूलों का मुद्दा

दरअसल, कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव से प्रदेश के स्कूलों की स्थिति को लेकर सवाल पूछा था, उन्होंने जानकारी मांगी थी कि राज्य में कितने प्राथमिक शाला, माध्यमिक शाला, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित हैं, इनमें कितने स्कूल अपने भवन में चल रहे हैं, कितने भवन जर्जर हैं और कितने स्कूल भवन विहीन हैं, इसके साथ ही विधायक ने यह भी पूछा था कि जिन स्कूलों के पास खुद का भवन नहीं है, वहां बच्चों की पढ़ाई की क्या व्यवस्था की गई है.

878 स्कूलों के पास नहीं है अपना भवन

शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने सदन में जवाब देते हुए बताया कि प्रदेश में कुल 878 स्कूल भवन विहीन हैं, इन स्कूलों का संचालन फिलहाल पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, किराये के भवन या अन्य वैकल्पिक स्थानों से किया जा रहा है, सरकार की ओर से जारी आंकड़ों में सामने आया है कि कई जिलों में अभी भी स्कूल भवनों की कमी बनी हुई है, जिसके कारण विद्यार्थियों और शिक्षकों को वैकल्पिक व्यवस्थाओं में पढ़ाई और शिक्षण कार्य करना पड़ रहा है.

बीजापुर में सबसे ज्यादा भवन विहीन स्कूल

जिलावार आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा भवन विहीन स्कूल बीजापुर जिले में हैं, यहां कुल 125 स्कूलों के पास अपना भवन नहीं है, इनमें 114 प्राथमिक शाला, 7 माध्यमिक शाला, 3 हाई स्कूल और 1 हायर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं, वहीं सबसे कम भवन विहीन स्कूल जांजगीर-चांपा जिले में है, यहां केवल 1 हाई स्कूल ऐसा है, जिसके पास अपना भवन नहीं है.

चरणबद्ध तरीके से बनाए जा रहे नए स्कूल भवन

सरकार का कहना है कि स्कूल भवनों का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है, बजट उपलब्धता और स्वीकृति के आधार पर नए भवनों का निर्माण कराया जाता है, भवन विहीन स्कूलों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर प्रस्ताव तैयार किए जाते हैं और संबंधित योजनाओं के माध्यम से भवन निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है, विधानसभा में सामने आए इन आंकड़ों के बाद प्रदेश के स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है.

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