CG News: दुर्ग में पपीता किसानों को भारी नुकसान, दाम गिरने और डीजल संकट से तबाह हुई खेती

CG News: दुर्ग में पपीता किसानों को भारी नुकसान, दाम गिरने और डीजल संकट से तबाह हुई खेती

CG News: दुर्ग में पपीता किसानों को भारी नुकसान, दाम गिरने और डीजल संकट से तबाह हुई खेती

CG News: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से किसानों की बेबसी और नुकसान की बड़ी तस्वीर सामने आई है। यहां धमधा क्षेत्र में पपीता किसानों ने अपनी ही तैयार फसल पर ट्रैक्टर चलाकर उसे नष्ट कर दिया। वजह बनी बाजार में पपीते के गिरते दाम और डीजल संकट, जिसके कारण फसल मंडियों तक पहुंच ही नहीं पाई, करीब 500 एकड़ में लगी लाखों रुपए की पपीता फसल अब खेतों में बर्बाद हो चुकी है।

अच्छे दाम की उम्मीद में बढ़ाई थी खेती

किसानों का कहना है कि पिछले साल पपीते के अच्छे दाम मिले थे। बाजार में 18 से 20 रुपए किलो तक भाव मिलने से इस बार बड़ी संख्या में किसानों ने पपीते की खेती की, लेकिन इस साल उत्पादन ज्यादा होने से बाजार में आवक बढ़ गई और कीमतें गिरकर 6 से 7 रुपए किलो तक पहुंच गईं। कई बार सिर्फ 10 से 12 रुपए किलो तक ही भाव मिल पाया।

डीजल संकट ने बढ़ाई मुश्किल

स्थिति तब और खराब हो गई जब डीजल संकट के कारण ट्रकों की आवाजाही प्रभावित हो गई, धमधा क्षेत्र से कच्चा पपीता पश्चिम बंगाल, बिहार और दिल्ली तक भेजा जाता है, लेकिन ट्रांसपोर्ट बंद होने से तैयार माल खेतों में ही फंस गया। धीरे-धीरे पपीते पकने लगे और खराब होने लगे, धमधा के किसान शिवकुमार वर्मा ने बताया कि उन्होंने 50 एकड़ में पपीते की खेती की थी। अच्छी पैदावार होने के बावजूद खरीदार नहीं मिले, मजबूरी में उन्हें पूरी फसल पर ट्रैक्टर चलवाकर खेत खाली करना पड़ा ताकि अगली फसल की तैयारी की जा सके।

लागत भी नहीं निकाल पाए किसान

किसान जालम सिंह पटेल ने बताया कि उन्होंने 10 एकड़ में करीब 10 लाख रुपए खर्च किए थे, लेकिन पूरे सीजन में सिर्फ 7 लाख रुपए की ही बिक्री हो सकी, वहीं किसान विवेक वर्मा ने कहा कि 15 एकड़ की फसल से अच्छे मुनाफे की उम्मीद थी, लेकिन नुकसान लगातार बढ़ता गया और आखिरकार पूरी फसल नष्ट करनी पड़ी, पथरीकला की किसान डिलेश्वरी वर्मा ने बताया कि उनके 20 एकड़ खेत में 16,500 पौधों पर करीब 80 टन पपीता तैयार था, उन्होंने कहा कि अगर सिर्फ 2 रुपए किलो का भी मुनाफा मिलता तो करीब 1 लाख 80 हजार रुपए की आमदनी हो सकती थी, लेकिन खरीदार नहीं मिलने से पूरी फसल खेत में ही रौंदनी पड़ी।

किसानों ने उठाई फूड पार्क की मांग

लगातार नुकसान के बाद किसानों ने अब इलाके में फूड पार्क और कोल्ड स्टोरेज की मांग तेज कर दी है, किसानों का कहना है कि अगर भंडारण और प्रोसेसिंग की सुविधा होती तो फसल खराब नहीं होती और उन्हें इतना नुकसान नहीं झेलना पड़ता।

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