प्रयागराज माघ मेले में धरने के बीच शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अस्वस्थ, तेज बुखार से हालत बिगड़ी

प्रयागराज माघ मेले में धरने के बीच शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अस्वस्थ, तेज बुखार से हालत बिगड़ी

प्रयागराज: माघ मेले के दौरान पिछले कई दिनों से प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठे ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत अचानक बिगड़ गई है। जानकारी के अनुसार उन्हें तेज बुखार हो गया है, जिसके चलते वे शुक्रवार सुबह से अपने विश्राम वाहन से बाहर नहीं निकल सके।

स्वास्थ्य कारणों से कार्यक्रमों से दूरी

शिष्यों ने बताया कि खराब स्वास्थ्य की वजह से शंकराचार्य ने वसंत पंचमी के अवसर पर संगम स्नान नहीं किया। सुबह से ही वे अपनी वैनिटी वैन में आराम कर रहे हैं और किसी से मुलाकात नहीं कर रहे।

धरने की वजह से बढ़ी तबीयत की परेशानी

बताया जा रहा है कि लगातार कड़ाके की ठंड, खुले वातावरण में बैठकर विरोध प्रदर्शन और शारीरिक थकान के कारण उनकी सेहत प्रभावित हुई है। बीते पांच दिनों से वे माघ मेला क्षेत्र में पालकी पर बैठकर धरना दे रहे हैं।

मौनी अमावस्या विवाद के बाद शुरू हुआ टकराव

यह पूरा मामला 18 जनवरी (मौनी अमावस्या) से जुड़ा है। उस दिन शंकराचार्य अपने शिष्यों के साथ संगम स्नान के लिए निकले थे, लेकिन रास्ते में प्रशासन ने उन्हें पैदल जाने को कहा। इसी बात पर कहासुनी और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई, जिसके बाद शंकराचार्य ने धरना शुरू कर दिया।

प्रशासन से माफी की मांग पर अड़े शंकराचार्य

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि जब तक माघ मेला प्रशासन सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगता, तब तक वे संगम स्नान नहीं करेंगे। उनका कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई से उनकी गरिमा को ठेस पहुंची है।

शिवलिंग स्थापना की योजना भी रह गई अधूरी

शंकराचार्य माघ मेले में सवा लाख मिट्टी के शिवलिंगों की स्थापना के उद्देश्य से पहुंचे थे, लेकिन विवाद के चलते यह धार्मिक आयोजन पूरा नहीं हो सका।

नोटिस और चेतावनी से बढ़ा विवाद

धरने के बाद माघ मेला प्रशासन ने शंकराचार्य को दो अलग-अलग नोटिस जारी किए थे। इनमें एक नोटिस उनके पद को लेकर और दूसरा मौनी अमावस्या की घटना को लेकर जवाब मांगने से जुड़ा था। प्रशासन ने यह भी संकेत दिया था कि आगे कार्रवाई की जा सकती है।

सेहत और प्रशासनिक खामोशी ने बढ़ाई चिंता

फिलहाल शंकराचार्य की सेहत को लेकर शिष्य चिंतित हैं, वहीं प्रशासन की ओर से अब तक कोई औपचारिक समाधान सामने नहीं आया है। ऐसे में माघ मेले से जुड़ा यह विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा।

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