CG News : छत्तीसगढ़ में डिजिटल हेल्थ और जनभागीदारी से मलेरिया को मात
CG News : छत्तीसगढ़ जैसे विशाल और विविध भौगोलिक क्षेत्र वाले राज्य में मलेरिया की रोकथाम हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। लेकिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस दिशा में बेहद ठोस और निर्णायक कदम उठाए हैं, जिसकी वजह से मलेरिया संक्रमण दर में 60% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीकी नवाचार और जनसहभागिता को केंद्र में रखकर एक ऐसी रणनीति बनाई है, जिसने मलेरिया पर नियंत्रण के प्रयासों को नई दिशा दी है।
सीएम साय की बहुस्तरीय रणनीति
मुख्यमंत्री बनने के बाद विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई स्तरों पर काम किया है। उनका स्पष्ट निर्देश था कि बीमारी का इलाज करने से पहले उसकी रोकथाम पर ज़्यादा ध्यान दिया जाए। इसी सोच के साथ, पंचायत स्तर तक निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया और मेडिकल स्टाफ को जिला व ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षित किया गया।
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मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान की सफलता
छत्तीसगढ़ के बस्तर, कांकेर और सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल इलाकों में मानसून के दौरान होने वाले जलजमाव से पनपने वाले मलेरिया से निपटने के लिए, “मलेरिया मुक्त बस्तर” अभियान शुरू किया गया। इस अभियान के 12वें चरण (25 जून से 14 जुलाई 2025) में लगभग 14 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें 1,884 मलेरिया पॉजिटिव मरीज पाए गए।
इनमें से 61.8% बिना लक्षण वाले थे। इनकी समय पर पहचान ने संक्रमण को फैलने से रोका और राज्य में मलेरिया संक्रमण दर में उल्लेखनीय कमी लाई। दंतेवाड़ा और सुकमा जैसे दुर्गम क्षेत्रों में भी स्क्रीनिंग और इलाज प्रभावी साबित हुआ है, जो दर्शाता है कि अब स्वास्थ्य सेवाएं दूरस्थ जंगल क्षेत्रों तक भी पहुंच रही हैं।
मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ और जनभागीदारी
मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के तहत 27,266 घरों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें गर्भवती महिलाओं में मलेरिया पॉजिटिविटी दर मात्र 0.08% रही। इस सफलता के पीछे 92% घरों में मच्छरदानी का उपयोग और 68.73% घरों में इनडोर रेसिडुअल स्प्रे अहम रहे। साय सरकार ने ई-उपचार ऐप, टेलीमेडिसिन और जीआईएस मैपिंग जैसी आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया।
स्वस्थ छत्तीसगढ़, सशक्त छत्तीसगढ़ अभियान के तहत मितानिनों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षकों की जनभागीदारी सुनिश्चित की गई, जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत कर 24×7 सेवाएं और पर्याप्त दवाएं उपलब्ध कराई गईं।
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