CG News : प्रधानमंत्री आवास योजना में फोटोशॉप घोटाला , असली लाभार्थी आज भी बेघर

CG News : प्रधानमंत्री आवास योजना में फोटोशॉप घोटाला , असली लाभार्थी आज भी बेघर

CG News : प्रधानमंत्री आवास योजना में फोटोशॉप घोटाला , असली लाभार्थी आज भी बेघर

CG News : छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) में भारी अनियमितताओं का मामला सामने आया है। गरीबों को दिए जाने वाले आवासों में व्यापक भ्रष्टाचार, फर्जी जियो टैगिंग और कागजी हेराफेरी के गंभीर आरोप लगे हैं।

तिरपाल के नीचे जीवन, कागजों में पक्का मकान

पेंड्रा जनपद के बचरवार और भाड़ी पंचायतों में जांच के दौरान चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आईं। हितग्राही हीरालाल पनिका, भोला सिंह और देवशरण जैसे कई लोगों ने बताया कि या तो उनके अधूरे मकानों को पूर्ण दिखाया गया या फिर दूसरे के मकान की तस्वीरें उनके नाम से अपलोड कर दी गईं।

जांच में सामने आया है कि कई मकान केवल नींव या दरवाजे तक बने हैं, लेकिन दस्तावेजों में उन्हें पूर्ण दर्शा कर भुगतान कर लिया गया। इस पूरे फर्जीवाड़े को जियो टैगिंग तकनीक का दुरुपयोग कर अंजाम दिया गया, जिससे पारदर्शिता लाने का उद्देश्य ही ध्वस्त हो गया।

आज तुम उठाओगे, कल हम उठवाएंगे”—कांग्रेस जिलाध्यक्ष की टिप्पणी ने बढ़ाई हलचल

पुराना घोटाला, नई लापरवाहियां

यह कोई पहली घटना नहीं है। 2017-18 में जब यह क्षेत्र बिलासपुर जिले के अंतर्गत आता था, तब भी इसी तरह के आवास घोटालों में एफआईआर, निलंबन और गिरफ्तारियां हुई थीं। उस समय प्रशासनिक निगरानी की दूरी का बहाना दिया गया था, लेकिन अब जबकि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही एक अलग जिला है, तब भी यह लापरवाही जारी है।

आवास चोरी से पहले भी मच चुकी है सनसनी

इससे पहले भी पेंड्रा जनपद में ‘आवास चोरी’ का मामला सामने आया था, जिसमें कई आवास मित्रों और ब्लॉक कोऑर्डिनेटरों पर कार्रवाई हुई थी। कुछ को जेल भेजा गया, कई को बर्खास्त किया गया। लेकिन लगता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें अभी भी गहरी बनी हुई हैं।

योजना का उद्देश्य पर उठते सवाल

प्रधानमंत्री आवास योजना का मकसद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग के लोगों को सब्सिडी पर पक्का मकान देना है। इसके तहत पात्र लाभार्थियों को 6.5% ब्याज दर पर 15 वर्षों तक सब्सिडी मिलती है। लेकिन जब जिम्मेदार अधिकारी ही भ्रष्टाचार में लिप्त हों, तो योजना अपने उद्देश्य से भटक जाती है।

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