CG News : बिलासपुर के अपोलो अस्पताल पर FIR, फर्जी डॉक्टर के इलाज से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की मौत का आरोप
CG News : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित अपोलो अस्पताल एक बार फिर सवालों के घेरे में है। राज्य के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष पं. राजेन्द्र शुक्ल की मौत के मामले में अस्पताल प्रबंधन और एक फर्जी डॉक्टर पर पुलिस ने FIR दर्ज की है। यह गंभीर आरोप राजेन्द्र शुक्ल के बेटे डॉक्टर प्रदीप शुक्ल ने लगाए हैं।
डॉ. प्रदीप शुक्ल का कहना है कि 2006 में उनके पिता का इलाज अपोलो अस्पताल में जिस कार्डियोलॉजिस्ट ने किया, वह फर्जी डॉक्टर निकला।
आरोपी डॉक्टर नरेंद्र विक्रमादित्य यादव उर्फ जान केम पहले से ही फर्जी डिग्री के सहारे इलाज करने और कई मरीजों की मौत के आरोप में मध्यप्रदेश के दमोह से गिरफ्तार हो चुका है। 2006 में छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष पं. राजेन्द्र शुक्ल की मौत के मामले में अस्पताल की लापरवाही उजागर, फर्जी डॉक्टर पर पहले से दर्ज हैं कई केस।
दमोह में भी मौत का खेल: 7 मरीजों की गई जान
मध्यप्रदेश के दमोह मिशन अस्पताल में इसी फर्जी डॉक्टर ने दिसंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच कुल 15 हार्ट ऑपरेशन किए। हैरानी की बात यह रही कि इनमें से 7 मरीजों की संदिग्ध मौत हो गई। जब परिजनों ने संदेह जताया, तब मानवाधिकार आयोग की नजर में यह मामला आया और जांच शुरू हुई।
बिलासपुर कनेक्शन आया सामने
दमोह केस की जांच में यह चौकाने वाला तथ्य सामने आया कि यही डॉक्टर बिलासपुर में भी अपोलो अस्पताल में कार्यरत था। अब यह आरोप लगे हैं कि इसी डॉक्टर की लापरवाही से पं. राजेन्द्र शुक्ल की जान गई। इस घटना के उजागर होने के बाद बिलासपुर पुलिस ने आरोपी डॉक्टर और अपोलो अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ FIR दर्ज की है।
अस्पताल प्रबंधन पर भी केस दर्ज
प्रश्न यह उठ रहा है कि बिना दस्तावेज सत्यापन के एक फर्जी डॉक्टर को कैसे अपोलो अस्पताल ने नियुक्त कर लिया। शिकायत के आधार पर अपोलो प्रबंधन पर भी IPC की धारा 420, 465, 466, 468, 471, 304 और 34 के तहत केस दर्ज हुआ है।
पुलिस अब अपोलो प्रबंधन की भूमिका और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया की गंभीरता से जांच कर रही है।
आगे क्या होगा?
इस मामले ने निजी अस्पतालों की नियुक्ति प्रक्रिया और मरीजों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पीड़ित परिजनों का कहना है कि दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए ताकि आगे इस तरह की लापरवाही से किसी और की जान न जाए।
फर्जी डॉक्टर की नियुक्ति और मरीजों की मौत से जुड़े इस सनसनीखेज मामले ने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भरोसे की बुनियाद को झकझोर कर रख दिया है। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच और अदालत के फैसले पर टिकी हैं।