Chhattisgarh News : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बड़ा संदेश – “अगली नवरात्रि तक बस्तर से ‘लाल आतंक’ का अंत हो”
Chhattisgarh News : बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से आयोजित ‘बस्तर पंडुम’ का समापन समारोह ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षणों से भरपूर रहा। इस समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने न सिर्फ आदिवासी विरासत की सराहना की, बल्कि नक्सलवाद पर भी स्पष्ट रुख अपनाते हुए इसे पूरी तरह समाप्त करने का संकल्प दोहराया।
बस्तर को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय मंच
हजारों की संख्या में उपस्थित जनजातीय समुदाय को संबोधित करते हुए अमित शाह ने घोषणा की कि अगले वर्ष बस्तर पंडुम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश को साझा करते हुए उन्होंने कहा:“देशभर के आदिवासी जिलों से कलाकारों को आमंत्रित किया जाएगा और दिल्ली में पदस्थ विदेशी राजदूतों को बस्तर लाकर इसकी कला-संस्कृति से रूबरू कराया जाएगा।”
अब तक का सबसे बड़ा आयोजन — ₹5 करोड़ का बजट
इस आयोजन के लिए ₹5 करोड़ का बजट जिला प्रशासन और संस्कृति विभाग द्वारा आवंटित किया गया, जो अब तक का सबसे बड़ा सांस्कृतिक आयोजन बन गया है। बस्तर पंडुम ने स्थानीय लोककला, शिल्प, त्योहार, खानपान, आभूषण और वाद्ययंत्रों को उसके मौलिक स्वरूप में प्रस्तुत किया।
गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर के युवाओं को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना ज़रूरी है, लेकिन इसके साथ-साथ अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराएं भी सहेज कर रखनी होंगी। “बस्तर की संस्कृति भारत की सांस्कृतिक थाती है, इसे संरक्षित करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।”
तेंदूपत्ता की सीधी खरीदी – अब 5500 रुपये प्रति बोरी
एक बड़ी घोषणा करते हुए शाह ने कहा कि अब से तेंदूपत्ता की खरीदी ₹5500 प्रति मानक बोरी की दर से की जाएगी।
इस राशि को प्रत्यक्ष रूप से आदिवासियों के खातों में ट्रांसफर किया जाएगा। दलालों की कोई आवश्यकता नहीं होगी।
“हम किसी की मौत से खुश नहीं होते। लेकिन अब समय है कि बस्तर को विकास की राह पर ले जाया जाए।” उन्होंने यह भी कहा कि जो गांव नक्सलियों को आत्मसमर्पण कराएंगे, उन्हें ‘नक्सल मुक्त गांव’ घोषित किया जाएगा और उन्हें ₹1 करोड़ का विशेष पुरस्कार मिलेगा।
राष्ट्रपति को आमंत्रण और गर्व का क्षण
अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनजातीय सशक्तिकरण नीति को सराहा और गर्व से कहा: “75 वर्षों में पहली बार कोई आदिवासी राष्ट्रपति बनी — ओडिशा की बेटी द्रौपदी मुर्मू।” उन्होंने इच्छा जताई कि अगली बार जब बस्तर पंडुम आयोजित हो, तो राष्ट्रपति महोदया स्वयं इसमें सम्मिलित हों।