CG News: 124 करोड़ की फायर ब्रिगेड खरीदी में देरी, हाईकोर्ट ने गृह और वित्त सचिव से मांगा जवाब
CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने 124 करोड़ रुपए की लागत से फायर ब्रिगेड गाड़ियों और आधुनिक उपकरणों की खरीदी में हो रही देरी पर नाराजगी जताई है. प्रदेश में दमकल वाहनों, आधुनिक फायर उपकरणों और पर्याप्त स्टाफ की कमी को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य शासन के गृह सचिव और वित्त सचिव को व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी.
टेंडर पूरा, फिर भी नहीं हो सका एग्रीमेंट
पिछली सुनवाई में राज्य शासन ने बताया था कि 124 करोड़ रुपए के फायर उपकरण और वाहनों की खरीदी के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. लेकिन बुधवार की सुनवाई में सामने आया कि सबसे कम दर वाली कंपनी के साथ अब तक एग्रीमेंट नहीं हो सका है. समय सीमा खत्म होने के कारण अवधि बढ़ाने की फाइल गृह और वित्त विभाग में अटकी हुई है. डीजीपी ने जून में ही समय सीमा बढ़ाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिल सकी है.
रिमाइंडर के बाद भी नहीं मिली मंजूरी
न्याय मित्र सुदीप श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि पिछले दो महीनों में संबंधित विभागों को 5 रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं और इनमें हाईकोर्ट के आदेशों का भी उल्लेख किया गया था. इसके बावजूद प्रशासनिक और वित्तीय अनुमति लंबित है. राज्य शासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मामला अंतिम चरण में है और जल्द ही प्रशासनिक तथा वित्तीय स्वीकृति मिलने की उम्मीद है. इस पर हाईकोर्ट ने गृह और वित्त विभाग के सचिवों को व्यक्तिगत शपथपत्र पेश करने के निर्देश दिए.
बिलासपुर में 2020 से अटका फायर सिस्टम प्रोजेक्ट
बिलासपुर में फायर सिस्टम प्रोजेक्ट को साल 2020 में ही प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी थी, लेकिन जमीन तय करने में ही करीब चार साल लग गए. पहले सर्किट हाउस के पास जमीन तय की गई, जिसे बाद में निरस्त कर शहर के बाहरी इलाकों में जमीन की तलाश शुरू हुई. आखिरकार कुदुदंड पानी टंकी के पास खाली पड़ी जमीन को प्रोजेक्ट के लिए तय किया गया. निर्माण की जिम्मेदारी कांट्रैक्टर सुरेश वर्मा को दी गई थी और 6 महीने में काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था.
अब तक सिर्फ पिलर खड़े, हाईकोर्ट के रुख पर नजर
निर्धारित समय सीमा के बावजूद बिलासपुर के फायर सिस्टम प्रोजेक्ट में अब तक केवल पिलर खड़े हो सके हैं. पीडब्ल्यूडी के स्तर पर लापरवाही और ठेकेदार की लेटलतीफी के आरोपों के बीच निर्माण कार्य भी प्रभावित है. वहीं, प्रदेश में फायर ब्रिगेड वाहनों और आधुनिक उपकरणों की 124 करोड़ रुपए की खरीदी भी प्रशासनिक मंजूरी के इंतजार में अटकी है. अब 31 अगस्त को होने वाली सुनवाई में गृह और वित्त सचिवों के शपथपत्र के आधार पर हाईकोर्ट का अगला रुख सामने आएगा.
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