CG News : नेशनल हेराल्ड चार्जशीट पर कांग्रेस का पलटवार, सुप्रिया श्रीनेत बोलीं- मोदी सरकार की ‘प्रतिशोध की राजनीति
CG News : नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। रायपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इसे “मोदी सरकार की प्रतिशोध की राजनीति” बताया।
कांग्रेस की आवाज़ दबाने की साज़िश
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि यह मामला कांग्रेस की छवि को धूमिल करने और जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम आगामी बिहार चुनावों से पहले जानबूझकर उठाया गया ताकि कांग्रेस जनता के मुद्दों पर पूरी ताकत से न बोल सके।
ब्रिटिश हुकूमत की तरह व्यवहार कर रही मोदी सरकार
उन्होंने कहा, “ब्रिटिश हुकूमत जिस तरह ‘नेशनल हेराल्ड’ से चिढ़ती थी, वैसे ही आज की मोदी सरकार असहज हो रही है।” उन्होंने दावा किया कि पिछले 11 वर्षों में ईडी का इस्तेमाल केवल विपक्ष को निशाना बनाने के लिए किया गया है।
AJL और यंग इंडिया की कानूनी स्थिति स्पष्ट
प्रवक्ता ने बताया कि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को 90 करोड़ रुपये का लोन कांग्रेस ने नियमों के तहत दिया था, जिससे कर्मचारियों की सैलरी और अन्य देनदारियां चुकाई गईं। सुप्रिया ने यह भी स्पष्ट किया कि यंग इंडिया एक नॉन-प्रॉफिट कंपनी है, और AJL की संपत्तियों पर उसका कोई स्वामित्व नहीं है।
5,000 करोड़ का दावा ‘झूठा’, इनकम टैक्स विभाग का हवाला
बीजेपी द्वारा 5,000 करोड़ रुपये की संपत्ति के दावे को खारिज करते हुए उन्होंने बताया कि इनकम टैक्स विभाग ने खुद AJL की संपत्तियों का मूल्यांकन सिर्फ 369 करोड़ रुपये किया है।
चार्जशीट की टाइमिंग पर उठाए सवाल
सुप्रिया ने खुलासा किया कि ट्रिब्यूनल ने 10 अप्रैल 2024 को साफ निर्देश दिए थे कि एक साल में चार्जशीट दाखिल न होने पर केस रद्द माना जाएगा। इसी कारण केंद्र सरकार ने 9 अप्रैल 2025 को, यानी मियाद खत्म होने से ठीक एक दिन पहले, चार्जशीट दाखिल की।
डिप्टी सीएम अरुण साव के बयान पर तीखा जवाब
प्रेस वार्ता में उन्होंने छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव के बयान “राजनीतिक पार्टियां कोई बैंक नहीं होतीं” पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “उम्मीद है राज्य के डिप्टी सीएम पढ़े-लिखे होंगे और आर्थिक समझ रखते होंगे, वरना उनके बयान से वे चुनाव आयोग के फैसले पर ही सवाल खड़ा कर रहे हैं।”