CG News: नक्सली महासचिव देवजी के आत्मसमर्पण की चर्चा तेज, तेलंगाना में हथियार डालने की खबर; आधिकारिक पुष्टि बाकी
CG News: नक्सल संगठन के महासचिव और पोलित ब्यूरो सदस्य थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी के आत्मसमर्पण की खबर सामने आई है, बताया जा रहा है कि, देवजी ने अपने साथी CCM संग्राम के साथ तेलंगाना पुलिस के सामने हथियार डाल दिए हैं, हालांकि अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, छत्तीसगढ़ पुलिस की ओर से भी इस संबंध में कोई स्पष्ट बयान जारी नहीं किया गया है.
बसवा राजू के बाद बना था नया महासचिव
नक्सल संगठन में बड़े बदलाव के बाद देवजी को महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, दरअसल, बसवा राजू के एनकाउंटर के बाद संगठन ने देवजी को शीर्ष नेतृत्व सौंपा था, वर्तमान में वह संगठन का सबसे बड़ा चेहरा माना जा रहा था, देवजी पर केवल छत्तीसगढ़ में ही करीब डेढ़ करोड़ रुपए का इनाम घोषित है, जबकि उसके साथी संग्राम पर एक करोड़ रुपए का इनाम है.
गृहमंत्री का दावा: ‘नक्सलवाद अंतिम पड़ाव पर’
राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि, तेलंगाना पुलिस के सामने देवजी और संग्राम के आत्मसमर्पण की सूचना मिल रही है, जो नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता है, उन्होंने दावा किया कि, नक्सली आंदोलन अपने अंतिम चरण में है और 31 मार्च तक नक्सलवाद के समापन की दिशा में निर्णायक कदम उठाए जाएंगे, कर्रेगुट्टा अभियान के तहत अब तक 89 आईईडी बरामद किए जा चुके हैं.
‘आधिकारिक पुष्टि संबंधित एजेंसी ही करेगी’: बस्तर आईजी
बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने कहा कि, सीमावर्ती राज्य में कुछ वरिष्ठ नक्सली कैडरों के आत्मसमर्पण की खबरों पर चर्चा चल रही है, लेकिन प्रोटोकॉल के अनुसार आधिकारिक पुष्टि संबंधित एजेंसी या राज्य अधिकारी ही कर सकते हैं, उन्होंने नक्सली कैडरों से अपील की कि वे हिंसा त्यागकर समाज की मुख्यधारा में लौटें और शांति का मार्ग अपनाएं.
बस्तर में बचे लगभग 200 सक्रिय नक्सली
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक बस्तर के अलग-अलग इलाकों में करीब 200 आर्म्ड कैडर नक्सली शेष हैं, जो छोटे-छोटे समूहों में छिपे हुए हैं, महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (MMC) जोन लगभग समाप्त हो चुका है, उत्तर बस्तर और माड़ डिवीजन से भी नक्सल प्रभाव काफी कम हुआ है, बताया जा रहा है कि, दक्षिण बस्तर के जंगलों में पापाराव अपने साथियों के साथ छिपा हुआ है, जबकि मिशिर बेसरा झारखंड में सक्रिय है.
क्या यह नक्सल आंदोलन के अंत की शुरुआत है?
यदि देवजी के आत्मसमर्पण की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो इसे नक्सल आंदोलन के लिए बड़ा झटका माना जाएगा, सुरक्षा एजेंसियां लगातार दबाव बढ़ा रही हैं और संगठन के बचे हुए नेतृत्व से बातचीत की कोशिश भी जारी है, आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है.