CG news : गर्म सिंदूर” पर सियासत गरम: पीएम मोदी के बयान पर छत्तीसगढ़ में तीखी प्रतिक्रिया
CG news : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा “मेरी नसों में लहू नहीं, गर्म सिंदूर बह रहा है” वाले बयान को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। छत्तीसगढ़ में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने इस बयान को हास्यास्पद बताते हुए प्रधानमंत्री पर तंज कसा है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर सवाल उठाए हैं।
महंत का कटाक्ष: ‘अगर सिंदूर इतना प्रिय है तो…’
रायपुर विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चरणदास महंत ने कहा,
“प्रधानमंत्री का यह कहना कि उनकी नसों में गर्म सिंदूर बह रहा है, हास्यास्पद है। अगर सिंदूर से इतना ही प्रेम है, तो वे अपने मंत्रियों को कहें कि वे भी माथे पर सिंदूर लगाकर आएं।”
महंत ने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य अच्छा है, क्योंकि देश की बेटियों और बहनों के पतियों की शहादत को लेकर हर संवेदनशील नागरिक चिंतित है। उन्होंने कहा,
“हमारे सैनिक मारे जा रहे हैं, ऐसे में आतंकवाद के खिलाफ कड़ा कदम जरूरी है। लेकिन बयानबाजी की बजाय गंभीर रणनीति होनी चाहिए।”
भूपेश बघेल ने केंद्र से मांगा जवाब
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल उठाते हुए कहा,
“पहलगाम हमले में 26 लोग मारे गए। आज तक आतंकियों को पकड़ा नहीं गया, तो फिर इस ऑपरेशन को सफल कैसे माना जाए?”
बघेल ने अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा युद्धविराम की घोषणा पर भी संदेह जताते हुए कहा कि यह कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने पूछा,
“पाकिस्तान से किस तरह के समझौते हुए? और आखिर किस आधार पर अमेरिका ने युद्धविराम की बात की?”
पीएम मोदी का बयान: ‘गर्म सिंदूर बह रहा है’
प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान के बीकानेर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा,
“अब मां भारती का सेवक मोदी सीना तानकर खड़ा है। मोदी का दिमाग ठंडा रहता है, लेकिन लहू गर्म है। अब मोदी की नसों में लहू नहीं, गर्म सिंदूर बह रहा है।”
गुजरात में एक अन्य सभा में प्रधानमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने आतंकवाद के 9 ठिकानों को 22 मिनट में नष्ट कर दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूरा अभियान कैमरे के सामने किया गया, ताकि कोई सबूत न मांग सके।
प्रधानमंत्री के ‘गर्म सिंदूर’ वाले बयान से एक ओर जहां उनकी राष्ट्रभक्ति की भावना झलकती है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी रेखाचित्र के रूप में देख रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी दिनों में यह बयानबाजी जनभावनाओं को किस ओर मोड़ती है।