CG News : छत्तीसगढ़ में भिंडी बीज खरीदी पर उठे सवाल: वैज्ञानिकों ने बताया अनुपयुक्त, फिर भी तीन गुना कीमत पर हुई सप्लाई

CG News : छत्तीसगढ़ में भिंडी बीज खरीदी पर उठे सवाल: वैज्ञानिकों ने बताया अनुपयुक्त, फिर भी तीन गुना कीमत पर हुई सप्लाई

CG News : छत्तीसगढ़ में भिंडी बीज खरीदी पर उठे सवाल: वैज्ञानिकों ने बताया अनुपयुक्त, फिर भी तीन गुना कीमत पर हुई सप्लाई

CG News : छत्तीसगढ़ में भिंडी के बीज की एक बड़ी और विवादास्पद खरीदी सामने आई है, जो न सिर्फ वैज्ञानिक सिफारिशों के विरुद्ध है, बल्कि आर्थिक रूप से भी सवालों के घेरे में है। जानकारी के अनुसार, गुजरात ओकरा हाइब्रिड-2 (GOH-2) नामक बीज के 4000 पैकेट जेम पोर्टल के माध्यम से खरीदे गए हैं, जिसकी कीमत ₹1268 प्रति किलो रही — जबकि बाजार में यही बीज मात्र ₹400 प्रति किलो में उपलब्ध है।

वैज्ञानिकों की रिपोर्ट: छत्तीसगढ़ के लिए अनुपयुक्त

यह बीज जूनागढ़ एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के वेजिटेबल रिसर्च स्टेशन द्वारा विकसित किया गया है, जिसकी 2008 की गजट अधिसूचना के अनुसार यह बीज केवल 18 राज्यों के लिए उपयुक्त पाया गया है। छत्तीसगढ़ इस सूची में शामिल नहीं है, फिर भी इसे सरकारी खरीद के जरिए किसानों तक पहुंचाया जा रहा है।

कृषि विशेषज्ञों का सवाल

कृषि क्षेत्र के रिटायर्ड अधिकारियों और विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी किस्म जो जलवायु और मिट्टी के अनुकूल नहीं है, उसे सरकारी अनुदान पर प्रमोट करना नीतिगत रूप से गलत है। यदि इसके कारण फसल खराब होती है या कीट-रोग फैलते हैं, तो किसानों की मेहनत और सरकारी संसाधनों दोनों की बर्बादी होगी।
“सरकारी योजना के तहत केवल वही किस्में दी जानी चाहिए जो तकनीकी रूप से प्रमाणित हों। यह किसानों के विश्वास और सरकार की जवाबदेही से जुड़ा मामला है।” – कृषि विशेषज्ञ

किसानों को बाज़ार से मिल रहा सस्ता और उपयुक्त बीज

एक उदाहरण में, किसान खिलावन सेन को वही श्रेणी का भिंडी बीज बाजार में मात्र ₹400 में मिला, जबकि सरकारी खरीदी में इसी बीज की कीमत तीन गुना अधिक रही। यह स्पष्ट करता है कि यह खरीद न केवल वित्तीय दृष्टिकोण से संदिग्ध है, बल्कि किसानों के हितों के साथ सीधा खिलवाड़ है।

हॉर्टिकल्चर विभाग की प्रतिक्रिया

मामले पर horticulture विभाग के निदेशक का कहना है कि जिलों के अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है और मामले की जांच की जा रही है। हालांकि, इस बीच यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
छत्तीसगढ़ में बीज खरीदी का यह मामला एक बार फिर सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और ज़मीनी सच्चाई के बीच अंतर को उजागर करता है। यह आवश्यक है कि कृषि संबंधित सभी योजनाएं वैज्ञानिक परीक्षण, स्थानीय अनुकूलता और किसान हितों को केंद्र में रखकर बनाई और क्रियान्वित की जाएं।

Related Post

Latest News
CG News: बिलासपुर के ग्रामीण इलाकों में एक भी आयरन और फ्लोराइड रिमूवल प्लांट नहीं, स्वास्थ्य पर मंडरा रहा गंभीर खतरा CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना में बढ़ाई मुआवजे की राशि, 17.40 लाख से बढ़ाकर 24.39 लाख रुपए करने का दिया आदेश CG News: छत्तीसगढ़ में परिसीमन और महिला आरक्षण बिल को लेकर चर्चाएं तेज, विधानसभा सीटें 90 से बढ़कर 135 होने की संभावना CG News: दुर्ग के स्टील प्लांट में पिघला लोहा गिरने से ठेकेदार की मौत, 1500 डिग्री तापमान की चपेट में आने से झुलसे CG News: बिलासपुर में गुपचुप खाने के बाद एक ही परिवार के सात सदस्य फूड पॉइजनिंग का शिकार, सिम्स अस्पताल में चल रहा इलाज CG News: छत्तीसगढ़ के 30 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता अटकी, 23 अक्टूबर तक कमियां दूर करने का निर्देश
Circuit not found — Panel21
404 · OPEN CIRCUIT

Nothing wired to this address.

The page you asked for isn't on the panel. Head back to the main bus.

Return home