महाशिवरात्रि मेले में दुकान बंद कराने पर विवाद: दुर्ग में बजरंग दल और मुस्लिम व्यापारियों के बीच तनाव
दुर्ग जिले के देव बलौदा-चरोदा क्षेत्र में महाशिवरात्रि मेले के दौरान कुछ मुस्लिम व्यापारियों की दुकानें बंद कराए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
13वीं शताब्दी के प्राचीन शिव मंदिर परिसर में 15-16 फरवरी को मेला आयोजित किया गया था। मेले में विभिन्न समुदायों के व्यापारियों ने दुकानें लगाई थीं। विवाद तब शुरू हुआ जब एक चाट विक्रेता के ठेले पर “जय माता दी” लिखा होने के बावजूद ऑनलाइन भुगतान के दौरान अलग नाम प्रदर्शित हुआ। इस पर कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं ने पहचान छिपाकर व्यापार करने का आरोप लगाया और आपत्ति जताई।
दुकानें बंद कराने के आरोप
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ दुकानदारों से नाम और धर्म पूछे गए तथा कथित तौर पर उन्हें दुकानें बंद करने के लिए कहा गया। इस दौरान बहस और नोकझोंक के वीडियो भी सामने आए हैं।
मुस्लिम व्यापारियों का कहना है कि वे वर्षों से इस मेले में दुकान लगाते आ रहे हैं और उनका उद्देश्य केवल व्यापार करना है।
मुस्लिम व्यापारियों का पक्ष
कुछ व्यापारियों ने कहा कि वे 20-25 वर्षों से इस क्षेत्र के मड़ई बाजार और मेलों में हिस्सा लेते रहे हैं। उनका कहना है कि वे किसी धार्मिक विवाद में नहीं पड़ना चाहते और केवल रोज़गार के लिए दुकान लगाते हैं।
बजरंग दल का पक्ष
बजरंग दल से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि पहचान स्पष्ट होनी चाहिए और किसी भी प्रकार की “भ्रामक जानकारी” देकर व्यापार नहीं किया जाना चाहिए। संगठन ने राज्य सरकार से मंदिर परिसरों के आसपास दुकान लगाने को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने की मांग की है।
पुलिस की मौजूदगी
घटना के दौरान स्थानीय पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद थे। फिलहाल प्रशासन की ओर से किसी औपचारिक कार्रवाई या प्रतिबंध संबंधी आदेश की पुष्टि नहीं हुई है।
मामले को लेकर प्रशासन की ओर से जांच या समीक्षा की संभावना जताई जा रही है।
सामाजिक सौहार्द पर सवाल
घटना के बाद क्षेत्र में सामाजिक सौहार्द और धार्मिक सह-अस्तित्व को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय लोगों का मानना है कि मेलों और धार्मिक आयोजनों में शांति और आपसी सम्मान बनाए रखना आवश्यक है।