Delhi News: ठंड से बचाव पर दिल्ली हाईकोर्ट का कड़ा रुख, अस्पतालों में मरीजों और परिजनों के लिए भी आश्रय अनिवार्य
Delhi News: राजधानी में बढ़ती ठंड को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय ने सरकार को उसकी संवैधानिक जिम्मेदारियों की याद दिलाई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि, ठंड से बचाव की व्यवस्था केवल बेघर लोगों तक सीमित नहीं होनी चाहिए.
कल्याणकारी राज्य की जिम्मेदारी
मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि, एक कल्याणकारी राज्य में सरकार की जिम्मेदारी है कि, वह हर नागरिक को सुरक्षित और गरिमापूर्ण जीवन की सुविधा उपलब्ध कराए.

अस्पतालों में आश्रय की व्यवस्था जरूरी
अदालत ने विशेष रूप से कहा कि, अस्पतालों में इलाज का इंतजार कर रहे मरीजों और उनके परिजनों को खुले में ठंड झेलने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, उनके लिए सुरक्षित और पर्याप्त आश्रय की व्यवस्था सरकार को करनी होगी.
फंड की कमी नहीं बन सकती बहाना
हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि, संसाधनों या बजट की कमी का हवाला देकर अधिकारी अपने संवैधानिक कर्तव्यों से बच नहीं सकते, रैन बसेरों में सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना अनिवार्य है.
स्वतः संज्ञान में लिया मामला
यह आदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पारित किया, अदालत ने एम्स समेत बड़े अस्पतालों के बाहर सड़कों पर रह रहे मरीजों और उनके परिजनों की दयनीय स्थिति पर गहरी चिंता जताई.
मौलिक अधिकारों से जुड़ा मामला
कोर्ट ने कहा कि, यदि नागरिकों को पर्याप्त आश्रय नहीं मिलता, तो यह संविधान के भाग-3 में दिए गए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता, हाईकोर्ट के इस सख्त रुख के बाद अब राजधानी में ठंड के मौसम के दौरान रैन बसेरों और अस्थायी आश्रयों की व्यवस्था को लेकर प्रशासन की जवाबदेही और बढ़ गई है.