CG News: छत्तीसगढ़ की नदियां प्रदूषण की चपेट में, शिवनाथ नदी सबसे अधिक संकटग्रस्त
CG News: छत्तीसगढ़ की प्रमुख नदियां महानदी, शिवनाथ, खारुन, अरपा, केलो और हसदेव—अब गंभीर प्रदूषण की चपेट में हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, इन नदियों के कई हिस्से देश की 296 सबसे प्रदूषित नदियों में शामिल हो चुके हैं।
केंद्रित क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर
विशेषकर शिवनाथ नदी की स्थिति अत्यधिक चिंताजनक है। दुर्ग जिले के झेंझरी गांव के पास समोदा नाला क्षेत्र में भिलाई इस्पात संयंत्र का अपशिष्ट जल मिलने से बीओडी स्तर 20.1–30 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया। इससे पानी बदबूदार और मानव उपयोग के लिए अनुपयुक्त हो गया है।
तीसरी श्रेणी की नदियां: महानदी, हसदेव और खारुन
सीपीसीबी के अनुसार, 10.1–20.0 मिलीग्राम प्रति लीटर बीओडी वाली नदियां तीसरी श्रेणी में आती हैं। महानदी (खरौद से मांड नदी क्षेत्र तक), हसदेव (चांपा के पास) और खारुन (खपरी नाला क्षेत्र) इस श्रेणी में शामिल हैं।
अपर्याप्त प्रदूषण नियंत्रण से बढ़ता खतरा
उच्च बीओडी के कारण पानी में ऑक्सीजन की कमी से जलीय जीवन संकट में पड़ रहा है। पानी का दुर्गंध और हानिकारक बैक्टीरिया जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो ये नदियां भविष्य में पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं।
सापेक्ष बेहतर स्थिति: अरपा और केलो
अरपा और केलो नदियों को पांचवीं श्रेणी (बीओडी 3–6 mg/L) में रखा गया है। हालांकि इनकी स्थिति अन्य नदियों से बेहतर है, लेकिन बढ़ता प्रदूषण भविष्य में चिंता का विषय है।