कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी मामला: सुप्रीम कोर्ट की मंत्री विजय शाह को सख्त फटकार, माफी को बताया देर से उठाया गया कदम
नई दिल्ली: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़े बयान को लेकर विवादों में घिरे मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने उनकी ओर से दी गई ऑनलाइन माफी को स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि अब माफी का समय निकल चुका है। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि मंत्री के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देने के सवाल पर दो सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए।
SIT रिपोर्ट पर कार्रवाई न होने पर नाराजगी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस बात पर गंभीर असंतोष जताया कि विशेष जांच दल (SIT) द्वारा जांच पूरी कर अंतिम रिपोर्ट सौंपे जाने के बावजूद राज्य सरकार ने कई महीनों से कोई निर्णय नहीं लिया है। अदालत ने इसे प्रशासनिक उदासीनता करार दिया।
विवादित बयान से शुरू हुआ मामला
यह विवाद उस बयान के बाद सामने आया था, जो मंत्री विजय शाह ने 11 मई को इंदौर जिले के महू क्षेत्र के रायकुंडा गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया था। उनके बयान को लेकर व्यापक आलोचना हुई और इसे सेना की वरिष्ठ अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के प्रति आपत्तिजनक बताया गया।
इस मामले में हाईकोर्ट के निर्देश पर 14 मई को महू के मानपुर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर को चुनौती देते हुए विजय शाह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।
माफी को कोर्ट ने नहीं माना पर्याप्त
सोमवार की सुनवाई के दौरान मंत्री की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल ने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है और जांच में सहयोग कर रहे हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह माफी वास्तविक नहीं लगती और इसे कानूनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास माना जा सकता है।
मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों को बोलते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि उनके शब्दों का समाज पर गहरा असर पड़ता है।
अन्य मामलों पर भी रिपोर्ट मांगी
पीठ ने यह भी कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट में मंत्री विजय शाह से जुड़े कुछ अन्य कथित आपत्तिजनक बयानों का उल्लेख है। अदालत ने एसआईटी को निर्देश दिया है कि इन मामलों में आगे प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर भी विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए।
राज्य सरकार को कानून के अनुसार कदम उठाने के निर्देश
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर कार्रवाई टालना उचित नहीं है कि मामला अदालत में लंबित है। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को कानून के तहत आवश्यक प्रक्रिया अपनाने और अभियोजन स्वीकृति पर समयबद्ध निर्णय लेने का निर्देश दिया।
फिलहाल इस पूरे मामले पर राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल तेज है। आने वाले दिनों में राज्य सरकार के फैसले और सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।